Stock Market Today: कमजोर ग्लोबल बाजारों के बीच, 24 जून को भारतीय इंडेक्स मामूली बढ़त के साथ खुले और निफ्टी 23800 के आसपास रहा। निफ्टी पर टेक महिंद्रा, अडानी एंटरप्राइजेज, इंफोसिस, डॉ. रेड्डीज लैब्स और ICICI बैंक में बढ़त देखी गई, जबकि बजाज ऑटो, हिंडाल्को, भारती एयरटेल, HCL टेक और ग्रासिम में गिरावट रही। वहीं, आज IRFC के शेयरों में लगभग 5% की गिरावट दर्ज की गई। केंद्र सरकार ने मंगलवार को 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) के जरिए इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IRFC) में 2% तक हिस्सेदारी बेचने की योजना की घोषणा की। जिसके बाद आज शेयरों में हलचल देखने को मिली।
एशिया शेयर बाजार का हाल
बुधवार, 24 जून को एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार हुआ। निवेशक यह आकलन कर रहे थे कि क्या टेक्नोलॉजी शेयरों में रिकवरी से बाजार के सेंटीमेंट में सुधार हो सकता है। इससे पहले वॉल स्ट्रीट पर भारी बिकवाली हुई थी, जिसके कारण पिछले सेशन में क्षेत्रीय इक्विटी में काफी गिरावट आई थी। मंगलवार को 3.6% की गिरावट के बाद MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स में 0.8% की बढ़त हुई। मंगलवार की गिरावट मार्च की शुरुआत के बाद से सबसे बड़ी गिरावट थी।
जापान का निक्केई 225 0.2% गिर गया, जबकि दक्षिण कोरिया का KOSPI एक दिन पहले 10% गिरने के बाद 3% से ज्यादा चढ़ गया। वहीं, ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 लगभग स्थिर रहा, यानी उसमें कोई खास बदलाव नहीं हुआ।
आईआरएफसी शेयरों पर असर
केंद्र सरकार ने मंगलवार को 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) के जरिए इंडियन रेलवे फ़ाइनेंस कॉर्पोरेशन (IRFC) में 2% तक हिस्सेदारी बेचने की योजना का ऐलान किया। इस प्रस्तावित डील के तहत, सरकार शुरू में सरकारी फाइनेंस कंपनी में 1% इक्विटी हिस्सेदारी बेचेगी। साथ ही, निवेशकों की मांग के आधार पर 'ग्रीनशू ऑप्शन' के जरिए अतिरिक्त 1% हिस्सेदारी बेचने का विकल्प भी होगा। जिसके बाद आज शेयरों में तेजी से गिरावट देखने को मिल रही है।
FII की खरीदारी पर एक्सपर्ट की राय
स्टॉक्सकार्ट के डायरेक्टर और CEO प्रणय अग्रवाल का कहना है कि "कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और स्थिर आउटलुक के बीच विदेशी निवेशकों की नजर भारत पर है। हाल ही में FII की खरीदारी का ट्रेंड बेहतर होते ग्लोबल सेंटीमेंट को दिखाता है, जिसे जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंताएं घटने से सपोर्ट मिला है। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और विदेशी निवेशकों को भारतीय इक्विटी में अपना निवेश बढ़ाने के लिए बढ़ावा मिला है। अगर ग्लोबल स्थिरता बनी रहती है और ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें सपोर्टिव रहती हैं, तो भारत में विदेशी निवेश का प्रवाह जून तक जारी रह सकता है। हालांकि, FII अपने निवेश के तरीके में चुनिंदा बने रहेंगे और ऐसे सेक्टर पर फोकस करेंगे जहां कमाई की अच्छी संभावना हो और जो घरेलू ग्रोथ के मौकों का फायदा उठाने की अच्छी स्थिति में हों। उनके निवेश के फैसले कमाई की क्वालिटी और ग्रोथ की संभावनाओं पर आधारित होंगे"।
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