24 अप्रैल, 2026 को भारतीय शेयर बाजार में भारी दबाव देखने को मिला। गुरुवार की बड़ी गिरावट के बाद आज सेंसेक्स और निफ्टी में जबरदस्त उतार-चढ़ाव रहा। निवेशक कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों को लेकर डरे हुए हैं। तेल के दाम बढ़ने से एक बार फिर महंगाई और ब्याज दरों में बढ़ोतरी का खतरा मंडराने लगा है। ग्लोबल मार्केट के खराब मूड ने रिटेल ट्रेडर्स और SIP निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

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बाजार में इस घबराहट की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेत हैं। विदेशी निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से तेजी से अपना पैसा निकाल रहे हैं। इस बिकवाली की सबसे ज्यादा मार आज बैंकिंग और IT सेक्टर की दिग्गज कंपनियों पर पड़ी। दूसरी ओर, घरेलू निवेशक चौथी तिमाही (Q4) के नतीजों पर नजरें गड़ाए हुए हैं। इन कंपनियों के मुनाफे के आंकड़े ही अगले हफ्ते बाजार की चाल तय करेंगे।

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कच्चे तेल की कीमतों और सेक्टर में बदलाव से सेंसेक्स-निफ्टी पर दबाव

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर पेंट और एयरलाइन जैसे खास सेक्टरों पर पड़ रहा है। ईंधन महंगा होने का मतलब है कि इन कंपनियों को अब ज्यादा खर्च करना होगा। इसी वजह से एविएशन और पेंट इंडस्ट्री के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को लेकर ट्रेडर्स का मिला-जुला रुख रहा। ग्लोबल एनर्जी कॉस्ट में बदलाव के बीच घरेलू बाजार में फिलहाल सावधानी बरती जा रही है।

सेक्टर पर असरडेली ट्रेंडमुख्य वजह
पेंट और एयरलाइंसकमजोरकच्चे तेल की कीमत
बैंकिंग और ITउतार-चढ़ाव भराQ4 नतीजों की खबरें
तेल कंपनियांमिला-जुलाग्लोबल डिमांड

आज सुबह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया और ज्यादा फिसल गया। डॉलर के मजबूत होने से भारत के लिए आयात (इंपोर्ट) महंगा हो जाता है। विदेशी फंड्स की लगातार निकासी से रुपये पर दबाव और बढ़ गया है। जानकारों का मानना है कि कमजोर करेंसी नए विदेशी निवेश की रफ्तार को धीमा कर सकती है। अब ट्रेडर्स की नजरें रिजर्व बैंक के किसी भी सकारात्मक संकेत पर टिकी हैं।

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बैंकिंग और IT सेक्टर के दबाव पर टिकी नजर

जब तक कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक तनाव कम नहीं होता, बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। बैंकिंग और IT शेयरों में निवेशकों का भरोसा फिर से जीतने के लिए कंपनियों के नतीजे बहुत शानदार होने चाहिए। फिलहाल, रिटेल निवेशकों को अपने लॉन्ग-टर्म निवेश लक्ष्यों पर टिके रहने की सलाह है। बाजार के इस उतार-चढ़ाव भरे दौर में धैर्य बनाए रखना ही सबसे बेहतर रणनीति है। अब हर किसी को बाजार से जुड़ी अगली बड़ी खबर का इंतजार है।