नई दिल्ली, सितंबर 29। बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के बोर्ड ने कई अहम फैसले किए हैं। इनमें स्पॉट गोल्ड ट्रेडिंग के लिए फ्रेमवर्क, रिलेटेड पार्टी लेनदेन के लिए कड़े मानदंड, तकनीकी कंपनियों में बेहतर वोटिंग अधिकारों के साथ शेयर जारी करने के नियमों को आसान बनाना और डीलिस्टिंग मानदंड शामिल हैं। सेबी के गोल्ड के स्पॉट कारोबार के फ्रेमवर्क के तहत वॉल्ट मैनेजर गोल्ड डिपॉजिट स्वीकार कर सकते हैं और सिक्योरिटीज जारी कर सकते हैं, जिन्हें इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (ईजीआर) कहा जाएगा। ईजीआर को सिक्योरिटी के रूप में अधिसूचित किया जाएगा।
इन ईजीआर में एक अलग सेगमेंट के रूप में एक्सचेंजों पर किसी भी अन्य सिक्योरिटीज (जैसे स्टॉक ऑप्शन या स्टॉक फ्यूचर्स) के रूप में कारोबार किया जा सकता है। एक्सचेंज ईजीआर के डेनोमिनेशन (जैसे 1 ग्राम, 2 ग्राम आदि) तय कर सकते हैं। निवेशक जब तक चाहें ईजीआर को होल्ड कर सकते हैं या किसी वॉल्ट मैनेजर को इंस्ट्रूमेंट सरेंडर करके इसे अंडरलाइंड गोल्ड में बदल सकते हैं।
कोई भी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज ईजीआर ट्रेडिंग शुरू कर सकता है। यदि निवेशक चाहें तो ईजीआर को स्थायी रूप से रख सकते हैं। कॉस्ट में कटौती करने के लिए सेबी ने इन ईजीआर को बदल दिया है यानी एक वॉल्ट मैनेजर द्वारा क्रिएट किए गए ईजीआर को किसी अन्य वॉल्ट मैनेजर के पास रिडीम किया जा सकता है।
जानकारों का मानना है कि सही प्राइस और क्वालिटी स्टैंडर्ड पर स्टैंडर्डाइजेशन के साथ राष्ट्रव्यापी गोल्ड स्पॉट एक्सचेंज की सख्त जरूरी है। सोने का मुख्य रूप से कारोबार होता है और हाजिर सोने की कीमत अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग होती है, जबकि जीएसटी की दरें लगातार बरकरार रहती हैं। सोने का फिजिकल मूवमेंट अभी भी जोखिम भरा है और ई-गोल्ड या डीमैट रूप में डिलिवरी बहुत लोकप्रिय नहीं है। ऐसे में गोल्ड स्पॉट एक्सचेंज काम आ सकता है।
सेबी ने सेबी (म्यूचुअल फंड) विनियमों में भी संशोधन को मंजूरी दी, ताकि गोल्ड ईटीएफ के लिए मौजूदा रेगुलेटरी मैकेनिज्म के अनुरूप सिल्वर एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड की शुरुआत की जा सके। इसने सोशल एंटरप्राइज को फंड जुटाने में मदद करने के लिए सोशल स्टॉक एक्सचेंज (एसएसई) की शुरुआत को भी मंजूरी दी। व्यक्तियों के अलावा अन्य निवासी भारतीयों को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के घटक (कॉन्स्टिट्यूएंट्स) बनने की अनुमति देने का निर्णय लिया गया है जो आईएफएससी में एआईएफ के रूप में पंजीकृत हैं।
कुछ हफ्ते पहले रिपोर्ट्स सामने आईं थी कि सेबी डिजिटल गोल्ड ट्रेड को नियंत्रित करने के लिए नये नियम पेश करने की योजना बना रहा है। कहा गया था कि सेबी नए जमाने के निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे एसेट क्लास में नियामक शून्य (रेगुलेटरी वैक्यूम) को भरने की योजना बना रहा है। सेबी एक नया फ्रेमवर्क तैयार करने की योजना बना रहा था, जिसके जरिए रजिस्टर्ड ब्रोकेर और मार्केट इंटरमीडयरीज को प्रस्तावित स्पॉट एक्सचेंज पर डिजिटल सोना बेचने की अनुमति होगी। मई में सेबी ने डिजिटल गोल्ड में ट्रेडिंग के लिए प्रस्तावित एक्सचेंज पर एक कंसलटेशन पेपर जारी किया था।
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