नई दिल्ली: चीन अपने बेहतर इलेक्ट्रानिक उपकरणों को उपलब्ध कराने में हमेशा से अग्रसर रहा है। जबकि भारत में मौजूदा समय में इलेक्ट्रानिक मैन्यूफैक्चरिंग में कमी रही है। यहीं मुख्य कारण है कि भारत को ना चाहते हुए भी चीन से मदद लेनी पड़ती है। लेकिन इन सब के बीच भारत के लिए अच्छी खबर है। अब चीन के उपकरणों का इस्तेमाल न करके भारत चीन के अकड़ को कम करेंगा। मोबाइल खरीदने से पहले ऐसे चेक करें बैटरी, बच जाएगा नुकसान ये भी पढ़ें
आपको बता दें कि केंद्र सरकार की ओर से बजट में भारत को इलेक्ट्रानिक मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाने का ऐलान किया था, जिसका जल्द खाका तैयार किया जाएगा। मिली जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार की ओर से इस योजना पर अगले पांच साल में करीब 45 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसमें से 41 हजार करोड़ रुपए प्रोडक्शन से जुड़ी छूट के तौर पर दी जाएगी। वहीं 4 हजार करोड़ रुपए सब्सिडी के रुप में दी जाएगी।
सरकार बड़ी फर्म जैसे ऐपल, सैमसंग, हुआवे, ओप्पो और वीवो के अतिरिक्त उनके कॉन्ट्रैक्ट मैन्यूफैक्चर्स व्रिस्टन और फॉक्सकन को घरेलू स्तर पर निर्माण के लिए प्रोत्साहित कर सकती है। नई स्कीम प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) प्रचलित मॉडिफाइड स्पेशल इंसेंटिव पैकेज स्कीम (एम-एसआईपीएस) की जगह लेगी। सरकार को उम्मीद है कि नई स्कीम से अगले 5 साल में 2 लाख से ज्यादा नई नौकरियां आएंगी। इतना ही नहीं करीब 5 लाख करोड़ का निर्यात होगा।
इसके अलावा डायरेक्ट टैक्स रेवेन्यू के तौर पर करीब 5 हजार करोड़ रुपए सरकार को अगले पांच साल में मिलेंगे। योजना के तहत नई के दो चरण होंगे। पहले चरण में सरकार की तरफ से इलेक्ट्रानिक मैन्यूफैक्चरिंग वाली कंपनियों को मेन इन इंडिया समान की बिक्री पर 5 से 8 फीसदी छूट दी जाएगी। इसका कुल फंड 41 हजार करोड़ रुपए का होगा। वहीं दूसरे चरण में कैपिटल सब्सिडी और रिम्बर्समेंट पर 4 हजार करोड़ रुपए खर्च आएगा।
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