नयी दिल्ली। वित्त वर्ष 2020-21 के लिए यूनियन बजट 1 फरवरी को पेश किया जा सकता है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार बजट से एक दिन पहले 31 जनवरी को आर्थिक सर्वे संसद में रखा जा सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 2015-16 के बजट के बाद यह पहली बार जब शनिवार के दिन बजट पेश किया जायेगा। आम तौर पर शनिवार को बजट नहीं पेशा किया जाता। मगर 2015 में एनडीए सरकार ने इस ट्रेंड से हट कर शनिवार को बजट पेश किया था। यह 2019 के आम चुनावों के बाद मौजूदा एनडीए सरकार द्वारा पेश किया जाने वाला दूसरा बजट होगा। केंद्रीय बजट सरकार के फाइनेंस की सबसे व्यापक रिपोर्ट है जिसमें सभी स्रोतों से राजस्व और सभी गतिविधियों के लिए खर्चों को समेकित किया जाता है। बजट में वित्त वर्ष के लिए सरकार के खातों का अनुमान भी होता है, जिसे बजटीय अनुमान कहा जाता है।

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फिक्की ने की है इनकम टैक्स घटाने की मांग
इंडस्ट्री संस्था फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) ने सरकार से आगामी बजट में वस्तुओं और सेवाओं की मांग को बढ़ाने के लिए इनकम टैक्स रेट को कम करने का आग्रह किया है। साथ ही फिक्की ने कहा है कि सरकार को निर्यात को फिर से संगठित करने, रोजगार को प्रोत्साहित करने और देश में व्यापार करने की लागत को कम करने के उपायों की घोषणा करनी चाहिए। फिक्की ने शुक्रवार को वित्त मंत्रालय को सौंपे अपने पूर्वबोधन ज्ञापन में कहा है कि सरकार को उन लोगों के लिए डायरेक्ट आयकर स्लैब में संशोधन करने पर विचार करना चाहिए, जिनके लिए अधिकतम 30 फीसदी टैक्स रेट है। फिक्की के मुताबिक ये रेट केवल 20 लाख रुपये से ऊपर की आय वालों के लिए लागू होना चाहिए।

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घट सकता है इनकम टैक्स
वैसे केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आयकर में कटौती का संकेट दे चुकी हैं। उन्होंने हाल ही में कहा था कि अर्थव्यवस्था में मौजूदा सुस्ती के मद्देनजर सरकार कई उपायों पर विचार कर रही है, जिनमें इनकम टैक्स में कटौती शामिल है। सरकार की योजना इनकम टैक्स घटा कर मध्य-निम्न वर्ग के हाथ में खर्च करने के लिए पैसा पहुँचाने की है, जिससे मांग और खपत बढ़े। 2.5-10 लाख रुपये की सालाना आय पर 10 फीसदी और 10 से 20 लाख रुपये की आय वालों को 20 फीसदी टैक्स स्लैब में लाया जा सकता है।

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