नयी दिल्ली। चीन की भारतीय स्मार्टफोन्स मार्केट में अच्छी खासी हिस्सेदारी है। मगर भारत-चीन सीमा के विवाद दोनों तरफ से आयात-निर्यात में आ रही दिक्कतों के कारण मार्केट में नए स्मार्टफोन्स की सप्लाई बेहद कम हो गई है। इससे अचानक रिफर्बिश्ड फोन (पुराने या इस्तेमाल किए हुए) की मांग में तेजी देखने को मिल रही है। बता दें कि रिफर्बिश्ड फोन वो होते हैं जिन्हें किसी गड़बड़ी की वजह से ग्राहक कुछ समय इस्तेमाल करने के बाद सीमित समय में वापस कंपनी को रिटर्न कर देते हैं और फिर कंपनी उसी फोन की मरम्मत और उसकी गड़बड़ी को खत्म करके मार्केट में दोबारा लॉन्च कर देती है। ये फोन बेशक नए रूप में मिलते हैं, मगर असल में ये सैकंड ही होते हैं। नए स्मार्टफोन्स मार्केट में आ नहीं रहे इसलिए इन फोन्स की मांग काफी बढ़ गई है।
इंडस्ट्री से जुड़े एक व्यक्ति के अनुसार पिछले दो-तीन दिनों में रिफर्बिश्ड फोन की मांग में अचानक वृद्धि देखी जा रही है। हालांकि इन स्मार्टफोन्स की आपूर्ति भी कम हो रही है, क्योंकि स्टॉक में ऐसे फोन भी घट रहे हैं। बाजार में रीसेलिंग के लिए पुराने मोबाइल कम आ रहे थे, क्योंकि उपयोगकर्ता अपने फोन को अपग्रेड करने में अधिक समय ले रहे थे। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार ओमनी-चैनल की पुनर्विक्रेता Yaantra, जो पुराने उपकरणों को फिर से रिफर्बिश करने के लिए चीन से कम्पोनेंट खरीदती है, के पास 45-60 दिनों तक सप्लाई पूरा करने के लिए अच्छा खासा स्टॉक है। Aforeserve Group, जो Xtracover.com का मालिक है, ने जून में मांग में कोरोना से पहले के महीनों की तुलना में 3.5 गुना वृद्धि दर्ज की।
'अनलॉक 1.0' शुरू होने के बाद से ही Yaantra, कैशिफ़ाई, ओएलएक्स और एक्स्ट्राकवर मांग में वृद्धि देख रहे हैं। असल में फैक्ट्रियों में मैनपावर की कमी थी, जिससे नए डिवाइसेज की सप्लाई में शॉर्टेज आ गई है। Yaantra के सीईओ जयंत झा के अनुसार जून में कोरोना संकट से पहले के महीनों के मुकाबले दोगुना रिफर्बिश्ड स्मार्टफोन्स बेचे गए। सर्वाधिक बिक्री 5,000-15,000 रुपये की कैटेगरी वाले मोबाइलों की हुई। मार्केटप्लेस ओएलएक्स पर भी मांग कोरोना से पहले के लेवल पर पहुंच गई है। ओएलएक्स पर मांग के मामले में उन खरीदारों की तरफ से 40% की वृद्धि हुई है, जो सैकंड हैंड स्मार्टफोन खरीदना चाहते हैं। सप्लाई के मामले में मई के मुकाबले जून में 71% की वृद्धि हुई।
एक्सपर्ट कहते हैं कि Xiaomi, Vivo, Oppo, Realme और OnePlus जैसे प्रमुख स्मार्टफोन ब्रांड, जो कि चीन से कम्पोनेंट और उपकरण मंगाते हैं, के गोदामों में शून्य इन्वेंट्री होने जा रही है। मैन्युफैक्चरिंग में भी दिक्कत आ रही है, जो पहले से ही 40% क्षमता पर चल रही थी। उधर कस्टम विभाग ने पिछले हफ्ते से बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर चीन से आने वाले सभी शिपमेंट का 100% फिजिकल वेरिफिकेशन शुरू किया है, जिससे कार्गो के रिलीज में देरी हो रही है। वैसे एक अन्य इंडस्ट्री से जुड़े कारोबारी कहते हैं कि पुराने मोबाइलों की आपूर्ति की तुलना में रसद और वितरण एक बड़ी समस्या है।
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