Small Cap Fund : म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए एक अच्छा ऑप्शन इसलिए माना जाता है, क्योंकि एक तो इसमें तगड़ा रिटर्न मिलता है और दूसरे आपका पैसा फंड हाउस पूरी रिसर्च करने के बाद निवेश करते हैं। ऐसी कई स्कीमें हैं, जिन्होंने निवेशकों को बीते 3 सालों भारी भरकम रिटर्न दिया है। 3 साल का समय इसलिए खास है क्योंकि तीन साल पहले ही कोरोना की शुरुआत हुई थी। तब मार्केट काफी गिर गयी थी। पर जब मार्केट ने संभलना शुरू किया तो सेंसेक्स-निफ्टी नये रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गये थे। उसी से म्यूचुअल फंड्स को भी काफी फायदा हुआ। यहां हम आपको एक ऐसी ही स्कीम की जानकारी देने जा रहे हैं, जिसने 3 साल में निवेशकों का पैसा ढाई गुना से अधिक कर दिया है।
बैंक ऑफ इंडिया स्मॉल कैप फंड म्यूचुअल फंड स्कीम ने 3 साल में 151.86 फीसदी का एब्सॉल्यूट रिटर्न दिया है। इसने इस दौरान 35.53 फीसदी का सालाना रिटर्न जनरेट किया है, जो 27 फीसदी के कैटेगरी एवरेज रिटर्न से अधिक और बेहतर है। 151.86 फीसदी के एब्सॉल्यूट रिटर्न का मतलब है कि निवेशकों का पैसा ढाई गुना से अधिक हो गया।
411.81 करोड़ रुपये के स्मॉल फंड साइज के बावजूद, बैंक ऑफ इंडिया स्मॉल कैप फंड ने अपनी शुरुआत के बाद से 184.30 फीसदी का एब्सॉल्यूट रिटर्न दिया है। अगर किसी व्यक्ति ने 3 साल के लिए प्रति माह 10,000 रुपये की एसआईपी शुरू की होती, तो निवेश की वैल्यू आज 5.46 लाख रुपये होती। 3.6 लाख रुपये के कुल एसआईपी निवेश राशि पर आपको 51.78 प्रतिशत का रिटर्न मिलता। हालांकि इस बात का ध्यान रहे कि ये फंड अपना प्रदर्शन आगे भी दोहराएगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है।
बात करें फंड के पोर्टफोलियो की, तो इसमें 94.6 फीसदी हिस्सा इक्विटी का है और बाकी कैश है। इसके टॉप 4 सेक्टरों की होल्डिंग्स में कंस्ट्रक्शन (16.1 फीसदी), फाइनेंशियल्स (15.3 फीसदी), कैपिटल गुड्स (13.2 फीसदी) और केमिकल्स (13.2 फीसदी) शामिल हैं। बैंक ऑफ इंडिया स्मॉल कैप फंड के पोर्टफोलियो में 65 कंपनियां हैं। इन कंपनियों में आईसीआईसीआई बैंक, फेडरल बैंक, केनरा बैंक और सिटी यूनियन बैंक लिमिटेड जैसे टॉप बैंक शामिल हैं, जिन्होंने वास्तव में अच्छा प्रदर्शन किया है। इसके पास दो वो स्टॉक भी हैं जो अपोलो ग्रुप का हिस्सा हैं और उन्होंने बीते कुछ वर्षों में मजबूत प्रदर्शन किया है।
क्रिसिल ने बैंक ऑफ इंडिया स्मॉल कैप को नंबर 2 पर रखा है और मॉर्निंगस्टार ने इसे 5-स्टार रेटिंग दी है। इसके पोर्टफोलियो में 94.6 फीसदी इक्विटी की भारी हिस्सेदारी है, जबकि नकद में बहुत कम निवेश और डेब्ट में कोई निवेश नहीं है। यह भी ध्यान रहे कि इसका एक बड़ा हिस्सा कंस्ट्रक्शन सेक्टर में है जो बेहद अस्थिर है। इसलिए ध्यान रहे कि इस फंड में निवेश में जोखिम बहुत अधिक है।
नोट : यहां पर निवेश की सलाह नहीं दी जा रही है। इसलिए निवेश करने से पहले अपनी वित्तीय सलाहकार से राय जरूर लें।
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