Mutual Fund SIP : म्यूचुअल फंड सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) लंबे समय में पैसा बनाने का एक आसान और सुविधाजनक तरीका है। फिर भी कुछ निवेशक अपने एसआईपी से रिटर्न को अधिकतम करने में कामयाब नहीं हो पाते हैं क्योंकि वे कुछ बुनियादी गलतियां करते हैं। हम आपको निवेशकों की उन आम गलतियों को पहचानने और निवेश से अधिकतम लाभ उठाने के बारे में बताएंगे। आगे जानिए इन गलतियों के बारे में।
एसआईपी रेगुलर अवधि पर अनुशासन के साथ निवेश करने का तरीका है। हालाँकि, कई निवेशक एसआईपी को उत्साह के साथ शुरू तो करते हैं, मगर कई मासिक एसआईपी को छोड़ देते हैं। इसके कारण अलग-अलग हो सकते हैं। मगर ये तरीका बिल्कुल सही नहीं है। एसआईपी को रेगुलर जारी रखना जरूरी है। अगर आपने एसआईपी रोकी तो एक उदाहरण से समझें कि आपको क्या नुकसान होगा। अगर एक निवेशक जनवरी 2006 से जून 2021 (15 साल की अवधि) तक 10,000 रुपये का निवेश करता है, तो एक निवेशक 53.6 लाख रुपये हासिल करता, यहां रिटर्न 11.9 फीसदी की औसत वार्षिक दर के लिहाज से है। यदि वही निवेशक हर 15 साल में एक बार एसआईपी से चूक जाता है, तो उसका निवेश फंड घटकर 49.4 लाख रुपये हो जाएगा, यानी 15 साल की निवेश अवधि में निवेशक को 4.2 लाख रुपये का नुकसान होगा।
कई निवेशक हर साल एसआईपी में उतनी ही रकम निवेश करते रहते हैं, जिससे वे शुरुआत करते हैं। मगर आपकी इनकम जब बढ़ती है, तो यह सलाह दी जाती है कि निवेशक अपनी एसआईपी राशि बढ़ा दें। हर साल एसआईपी राशि को जितना संभव हो सके बढ़ाने की सलाह दी जाती है। जानकार कहते हैं कि अगर कोई निवेशक 20 साल के लिए प्रति माह 5,000 रुपये का निवेश करता है, तो वह 12 फीसदी के वार्षिक रिटर्न के साथ 49.96 लाख रुपये का फंड बनाएगा। हालांकि, अगर वही निवेशक हर साल अपनी एसआईपी राशि में 10 फीसदी की बढ़ोतरी करता है, तो फंड बढ़कर 1.15 करोड़ रुपये हो जाएगा।
एसआईपी निवेश का महत्व वास्तव में चक्रवृद्धि का होता है। लेकिन आईडीसीडब्लू प्लान्स आपके निवेश के चक्रवृद्धि प्रभाव को खत्म कर देते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि आपके निवेश पर किए गए पैसे को फिर से निवेश नहीं किया जाता है और बदले में आपको समय-समय पर रिटर्न के रूप में दिया जाता है। ऐसे में आप लंबे समय में बड़ा फंड नहीं बना सकते और न ही रिटर्न पर रिटर्न का फायदा पा सकते।
एसआईपी को लक्ष्य से न जोड़ना बिना किसी मंजिल के यात्रा पर जाने जैसा है। शिक्षा, विवाह, रिटायरमेंट आदि जैसे लक्ष्य होने से निवेशकों को योजनाओं और जोखिम और रिटर्न की सीमा तय करने में मदद मिलती है जो वे अपने म्यूचुअल फंड निवेश से उम्मीद कर रहे हैं।
कई निवेशक अपने निवेश की समय-समय पर समीक्षा नहीं करते हैं। जबकि यह सच है कि एसआईपी जैसे निवेश बाजार में दिन-प्रतिदिन के उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होते हैं और इसलिए, निवेशक के दैनिक फोकस की आवश्यकता नहीं होती है। मगर निश्चित अंतराल पर निवेश की निरंतर समीक्षा करना ही सही तरीका है।
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