Silver Rate Today: इस हफ्ते चांदी की कीमत में भारी उतार-चढ़ाव के बीच हफ्ते के आखिरी दिन आज रविवार, 7 जून को घरेलू सर्राफा बाजार में गोल्ड-सिल्वर के रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है। हालांकि, बीते दिन शनिवार को चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज हुआ था। वहीं आज साप्ताहिक अवकाश होने के चलते घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में ट्रेडिंग बंद है।
आज भारत में चांदी की कीमत (Silver Rate Today)
आज भारत में चांदी की कीमत 265 रुपये प्रति ग्राम है, जो कल की कीमत से 10 रुपये कम है। वहीं, चांदी का रेट 2,65,000 रुपये प्रति किलोग्राम है, जो कल की कीमत से 10,000 रुपये कम है।
MCX पर चांदी का रेट (MCX Silver Rates)
कमजोर ग्लोबल संकेतों के कारण MCX सिल्वर 2.60 लाख रुपये के स्तर से नीचे गिरकर 2,59,167 रुपये प्रति किलोग्राम के इंट्राडे निचले स्तर पर आ गई। खबर लिखे जाने के समय, MCX सिल्वर 3,616 रुपये या 1.4% गिरकर 2,61,180 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही थी।
एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि MCX सिल्वर में गैप-डाउन के साथ शुरुआत हुई और यह अभी भी 2,60,000 रुपये के अहम सपोर्ट लेवल से ऊपर बना हुआ है, जो जारी उतार-चढ़ाव के बीच सतर्क प्राइस एक्शन को दिखाता है। ऊपर की तरफ, अगर कीमत 2,62,500 रुपये से ऊपर बनी रहती है, तो इससे कीमतों में स्थिरता आ सकती है और 2,65,000 रुपये की ओर रिकवरी शुरू हो सकती है, साथ ही 2,67,000 रुपये तक और बढ़त की संभावना भी बन सकती है। नीचे की तरफ, अगर कीमत 2,60,000 रुपये से 2,59,000 रुपये के सपोर्ट ज़ोन से नीचे जाती है, तो यह कीमतों को 2,57,500 रुपये से 2,57,000 रुपये के दायरे में ला सकती है। कुल मिलाकर, निकट भविष्य के लिए रुख सतर्क है। मोमेंटम बेहतर करने के लिए रेजिस्टेंस से ऊपर ब्रेकआउट की ज़रूरत है, जबकि जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम और सेफ-हेवन डिमांड बाज़ार की दिशा तय कर रहे हैं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि शांति बातचीत अपने आखिरी चरण में है और हालिया तनाव के बावजूद वे ईरान के साथ बड़े पैमाने पर युद्ध में दोबारा शामिल होने के इच्छुक नहीं हैं। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि बातचीत में कोई खास प्रगति नहीं हुई है। ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह ने भी इज़राइल और लेबनान के बीच अमेरिका की मध्यस्थता वाले युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिससे क्षेत्रीय तनाव कम करने की कोशिशों पर संदेह और बढ़ गया। 'ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स' के अनुसार, लंबे समय से चल रहे संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति में लगातार रुकावट के कारण तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, जिससे महंगाई और ब्याज दरें बढ़ने के जोखिम को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
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