RBI New Deputy Governor Shirish Chandra Murmu: भारतीय रिजर्व बैंक की तीन दिवसीय मौद्रिक नीति बैठक आज यानी सोमवार (29) से शुरु होने के बीच केंद्र सरकार ने नए डिप्टी गवर्नर के नाम पर मुहर लगा दी है।
भारत के पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) शिरीष चंद्र मुर्मू को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का नया डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया गया है। मौजूदा समय में वे आरबीआई में एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में काम कर रहे हैं। उनके पास सुपर विजन डिपार्टमेंट भी है। शिरीष चंद्र मुर्मू को एम राजेश्वर राव की जगह नियुक्त किया गया है। एम राजेश्वर राव इसी सप्ताह रिटायर हो रहे हैं।
3 साल के लिए होगा कार्यकाल
RBI के डिप्टी गवर्नर के रूप में मुर्मू की नियुक्ति 9 अक्टूबर से प्रभावी होगी। उनकी नियुक्ति तीन वर्षों के लिए की गई है। डिप्टी गवर्नर का पद महत्वपूर्ण अधिकार रखता है, जो पदानुक्रम में RBI गवर्नर से ठीक नीचे होता है।
RBI में चार डिप्टी गवर्नर
भारतीय रिजर्व बैंक के चार डिप्टी गवर्नर हैं। ये मॉनिटरी पॉलिसी, फाइनेंशियल मार्केट रेगुलेशंस, बैकिंग सुपर विजन और रेगुलेशन जैसे विभागों में कार्यरत हैं। मौजूदा समय में एम राजेश्वर राव, स्वामीनाथन जानकीरमन, पूनम गुप्ता (अर्थशास्त्री), टी. रबी शंकर केंद्रीय बैंक के डिप्टी गवर्नर के रूप में कार्यरत हैं। इनमें एम राजेश्वर राव का कार्यकाल 8 अक्टूबर को समाप्त हो रहा है, जिनकी जगह बाद शिरीष चंद्र मुर्मू को नियुक्त किया गया है, जो 9 अक्टूबर को पदभार ग्रहण करेंगे।
डिप्टी गवर्नर की भूमिका
डिप्टी गवर्नर की भूमिका डिप्टी गवर्नर की भूमिका में नीति निर्माण और कार्यान्वयन सहित महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियां शामिल हैं। इस पद पर आने के बाद, मुर्मू को भारत के वित्तीय क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और विकास को बढ़ावा देने का कार्यभार सौंपा जाएगा। केंद्रीय बैंक की वेबसाइट के अनुसार, सचिव विभाग में उनका कार्य शासन संबंधी मामलों, विभागों के बीच समन्वय, नियामक अनुपालन और आंतरिक प्रशासन को कवर करता है।
कार्यकारी निदेशक के रूप में उनका पिछला अनुभव इस नई भूमिका में उनकी प्रभावशीलता में योगदान देगा। बैंकिंग समुदाय को उम्मीद है कि मुर्मू का नेतृत्व उनके कार्यकाल के दौरान RBI के उद्देश्यों का समर्थन करेगा। यह घटनाक्रम भारत के केंद्रीय बैंक में प्रमुख पदों पर बदलावों से संबंधित निरंतर अपडेट का हिस्सा है। हितधारक उत्सुकता से देख रहे हैं कि ये बदलाव भविष्य की नीतिगत दिशाओं और आर्थिक रणनीतियों को कैसे प्रभावित कर सकते हैं।
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