Share Market Down Today: शेयर बाजार में मंगलवार को जोरदार हलचल देखने को मिल रहा है. बाजार के प्रमुख इंडेक्स 1-1 फीसदी से ज्यादा टूट गए हैं. सेंसेक्स ऊपरी स्तरों से करीब 1350 अंकों तक फिसल गया है. यह शुरुआती कारोबार में 81,500 तक पहुंचा, जोकि फिसलकर 80,200 पर आ गया. निफ्टी भी 24450 के नीचे तक फिसला. बाजार की गिरावट में निवेशकों को भी भारी नुकसान हुआ है. बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर 444.31 लाख करोड़ रुपए पर फिसल गया.

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शेयर बाजार में चौतरफा बिकवाली

शेयर बाजार में 22 अक्टूबर को दूसरे हाफ में चौतरफा बिकवाली दर्ज की जा रही. सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे. सबसे ज्यादा गिरावट ऑटो, बैंकिंग, मीडिया समेत रियल्टी और ऑयल एंड गैस सेक्टर में दर्ज जा रही. निफ्टी में शामिल 50 में से 47 शेयर गिरावट के साथ ट्रेड कर रहे, जिसमें महिंद्रा एंड महिंद्रा का शेयर करीब 4 फीसदी की गिरावट के साथ टॉप लूजर है.

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निफ्टी में बीईएल, अदानी एंटरप्राइसेज, कोल इंडिया समेत टाटा स्टील के शेयर 3-4 फीसदी नीचे फिसल गए हैं. वहीं, आईसीआईसीआई बैंक के शेयर पौने एक फीसदी की उछाल के साथ टॉप गेनर है. नेस्ले इंडिया, भारती एयरटेल के शेयर भी आधे-आधे फीसदी की मजबूती के साथ ट्रेड कर रहे हैं.

अक्टूबर में अब तक निफ्टी करीब 5 फीसदी और सेंसेक्स करीब 4 फीसदी तक फिसल चुके हैं. ब्रॉडर मार्केट में खासकर तेज बिकवाली दर्ज की जा रही है. इस महीने मिडकैप इंडेक्स करीब पौने तीन फीसदी तक लुढ़क चुके हैं. स्मॉलकैप इंडेक्स तो करीब साढ़े तीन फीसदी तक गिर गया है.

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शेयर बाजार में गिरावट की वजह

शेयर बाजार में कारोबारी सेशन के दूसरे हाफ में आई तेज बिकवाली की वजह कई हैं. इसमें अर्निंग सीजन सबसे पहला है. क्योंकि अभी तक ज्यादा अच्छा नतीजे नहीं आए हैं, जिससे मार्केट को सपोर्ट मिल पाए.

विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी हावी है, जोकि 21 अक्टूबर तक 82,479.7 करोड़ रुपए की बिकवाली कर चुके हैं. हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने इस दौरान 77,402 करोड़ रुपए के शेयरों की खरीदारी की है. ग्लोबल मार्केट भी टूट गए हैं. साथ ही मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर भी बाजार पर देखने को मिल रहा है.

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आगे किन फैक्टर्स पर रहेगी बाजार की नजर?

बाजार के जानकारों का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार के लिए आगे कई अहम फैक्टर्स होंगे, जिन पर नजर रहेगी. इनमें दूसरी तिमाही के नतीजे जारी करने वाली कंपनियां शामिल हैं. इनके प्रदर्शन का असर बाजार पर रही है. इसके अलावा क्रूड ऑयल प्राइसेज, मिडिल ईस्ट में बढ़ता जियो-पॉलिटिकल टेंशन और अमेरिका में अगले महीने होने वाले प्रेसिडेंशियल इलेक्शन पर नजर होगी.