Stock Market: आज 31 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया गया है. इसके बाद शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली. मार्केट में लगभग सभी सेक्टर्स में खरीदारी हुई. बाजार में लगातार 4 दिनों से बढ़त जारी है, लेकिन तेजी आगे भी जारी रहेगी या नहीं? इसे लेकर निवेशकों के बीच चिंता है. क्योंकि इकोनॉमिक सर्वे 2025 में सरकार ने कुछ बातों को लेकर जोखिम का भी जिक्र किया है, जिसका असर भारतीय शेयर बाजारों पर भी दिख सकता है. चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर वी अनंत नागेश्वर के नेतृत्व में बने सर्वेक्षण में मजबूत आर्थिक ग्रोथ के साथ-साथ जियो-पॉलिटिकल टेंशन, करेंसी में जारी गिरावट समेत मुद्दों पर भी फोकस किया गया है.
आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक भारतीय शेयर बाजारों के लिए सबसे बड़ा रिस्क अमेरिका से जुड़ा हुआ है. इसमें अमेरिकी बाजारों में करेक्शन को लेकर आशंका जताई गई है, जिसका भारतीय शेयर बाजार के संदर्भ बेहद बुरा असर देखने को मिल सकता है. खासकर नए रिटेल निवेशकों के लिए भयानक स्थिति हो सकती है, जोकि कोरोना काल के दौरान या बाद में मार्केट में उतरे हैं.
करेक्शन नए रिटेल निवेशकों को पड़ेगा भारी?
सर्वे के मुताबिक अमेरिका में हाई वैल्युएशंस और आशावादी सेंटीमेंट 2025 में संभावित करेक्शन ला सकते हैं, जिसका असर भारतीय शेयर बाजारों पर भी पड़ सकता है. खासकर यंग इनवेस्टर्स पर इसका असर देखने को मिल सकता है, जोकि कोरोना महामारी के बाद शेयर बाजार में आए हैं. क्योंकि उन्हें बाजार में ज्यादा लंबे समय तक गिरावट का अनुभव नहीं है. बता दें कि पिछले 5 सालों में रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी संख्या और ट्रेडिंग दोनों के लिहाज से तेजी से बढ़ी है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई पर यूनिक इनवेस्टर्स बेस अगस्त, 2024 में 10 करोड़ के पार निकल गया. यह पिछले 4 सालों में तीगुना हुआ है.
अमेरिकी बाजारों में 2025 में क्यों आएगी बिकवाली?
अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट के कई फैक्टर्स हैं. सबसे पहला वैल्युएशंस है, जोकि काफी हाई है. एसएंडपी 500 इंडेक्स पीई रेश्यो तीसरे सबसे उच्चतम स्तर के बेहद करीब है, जोकि यह बताता है कि मार्केट काफी ओवरवैल्यूड है. दूसरा, मौजूदा रैली की वजह चुनिंदा टेक स्टॉक्स हैं, जिसमें एप्पल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों के शेयर शामिल हैं. मतलब ब्रॉडर मार्केट में मजबूती नहीं है. एसएंडपी 500 इंडेक्स, एक इक्वल वेट इंडेक्स है, जिसमें सभी कंपनियों का इंपोर्टेंस समान है.
इंडिया और US का मार्केट कनेक्शन
भारत और अमेरिका के बीच मार्केट करेक्शन का कनेक्शन काफी पुराना है. मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी शेयर बाजार के मूवमेंट का असर भारतीय शेयर बाजार पर सीधे तौर पर दिखता है. कम से कम बीते 24 साल के आंकड़े तो यही कहते हैं. 2000-2024 के दौरान एस एंड पी 500 इंडेक्स करीब 10 फीसदी से ज्यादा फिसला है. इसी दौरान निफ्टी 50 इंडेक्स भी औसतन 10.7 फीसदी टूटा है, जोकि लगभग हर केस में गिरा. वहीं, जब निफ्टी 50 इंडेक्स 10 फीसदी से ज्यादा उछला तब एस एंड पी 500 इंडेक्स कुछ केस में चढ़ा, लेकिन एवरेज में इस इंडेक्स में कम गिरावट दिखी. यह करीब 5.5 फीसदी टूटा.
इकोनॉमिक सर्वे 2025
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 31 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया. इसमें फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए रियल जीडीपी ग्रोथ 6.3-6.8 फीसदी का अनुमान रखा गया है. कई चुनौतियों के बावजूद सरकार ने मजबूत आर्थिक ग्रोथ का अनुमान रखा है. चुनौतियों में ग्लोबल फैक्टर्स भी शामिल हैं. मजबूत ग्रोथ अनुमान की वजह कैपेक्स विस्तार, महंगाई में कमी समेत लिस्टेड कंपनियों के बेहतर नतीजों को बताया जा रहा. बैंकिंग सेक्टर में स्टेबिलिटी भी पॉजिटिव है. साथ ही साथ FY26 में कम ब्याज दरों के भी संकेत दिए गए हैं.
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