Adani : इंडियन मार्केट रेगुलेटर ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अडानी ग्रुप के विनियामक प्रकटीकरण की संभावित खामियों को जांच का कोई भी गलत या वक्त से पहले फैसला कानूनी रूप से स्थिर नहीं होगा।

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29 अप्रैल को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अपनी जांच के किए 6 महीने का वक्त मांगा था। इसके बनाएं 3 मार्च को 2 महीने का वक्त दिया गया था।

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की तरफ से शुक्रवार को कहा गया था कि वह 3 महीने का विस्तार देना चाहता है।

जनवरी के महीने में अमेरिका स्थित शॉर्ट-विक्रेता हिंडनबर्ग रिसर्च ने अरबपति गौतम अडानी के नेतृत्व वाला अडानी ग्रुप पर कई सारे शासन से सम्बन्धित चिंताओं को उठाया था। समूह पर कई सारे आरोप लगाए गए थे। हालांकि, अडानी ग्रुप ने अपने सभी आरोपी से इंकार किया था।

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने एक अदालती फाइलिंग में यह कहा था कि भारतीय कानून का उलंघन करने के लिए अमेरिका स्थित शॉर्ट-विक्रेता हिंडनबर्ग रिसर्च के द्वारा हाइलाइट किए गए अडानी ग्रुप के लेन देन काफी जटिल है।

रेगुलेटर की तरफ से कहा गया है कि वह पहले ही 11 विदेशी रेगुलटर से जानकारी के लिए संपर्क कर चुका है कि क्या अडानी ग्रुप ने अपने पब्लिक शेयर के संबंध में किसी भी मापदंड का उलंघन किया है।

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भारतीय प्रतिभूति और विनिमय दर को तरफ से कहा गया है कि इस इस तरह का पहले अनुरोध को 6 अक्टूबर 2020 को किया हुआ था। नियामक की तरफ से कहा गया है कि निर्णायक निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले कई सारे स्रोतों से प्राप्त डाक्यूमेंट का विश्लेषण करना होगा।

सेबी ने सुप्रीम कोर्ट के प्रस्तुत किया कि सेबी के तरफ से वक्त में विस्तार के लिए दायर किए गए आवेदन का यह मतलब निवेशकों के हित को ध्यान में रखा है और न्याय को सुनिश्चित करना है।

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