SEBI: कैपिटल मार्केट रेगुलेटर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कागजी रूप में सिक्योरिटीज को रखने वालों के लिये नियमों को और आसान बनाया है।

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इसके तहत पैन, केवाईसी डीटेल और नॉमिनेशन के बिना सिक्योरिटीज पर रोक लगाने की आवश्यकता के प्रावधान को खत्म करने का निर्णय किया गया है।

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यह है उद्देश्य

एक सर्कुलर में सेबी की तरफ से कहा गया है कि इस पहल का उद्देश्य नियम को आसान बनाना है। उन्होंने कहा कि यह कदम तत्काल प्रभाव से लागू होगा। रजिस्ट्रार एसोसिएशन ऑफ इंडिया और निवेशकों से सुझाव मिलने के बाद यह निर्णय किया गया है।

जानिए पहले क्या थे नियम?

नियम के तहत लिस्टेड कंपनियों में फिजिकल रूप से शेयर रखने वाले सभी के लिए पैन, नॉमिनेशन, कॉन्टैक्ट डीटेल, बैंक अकाउंट डीटेल और संबंधित फोलियो नंबर के लिए नमूना हस्ताक्षर देना अनिवार्य था।

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मई में सेबी की तरफ से कहा गया था कि जिन 'फोलियो' में ऐसे दस्तावेजों में से कोई भी 1 अक्टूबर, 2023 को या उसके बाद उपलब्ध नहीं होगा, उन पर इश्यू और शेयर ट्रांसफर एजेंट्स को रोक लगाना आवश्यक है।

मार्केट रेगुलेटर ने मई में जारी सर्कुलर में संशोधन करते हुए सेबी की तरफ से कहा गया है कि 'फ्रीज' शब्द हटा दिया गया है। नियामक की तरफ से कहा गया है कि रजिस्ट्रार एसोसिएशन ऑफ इंडिया से प्राप्त प्रतिवेदन, निवेशकों से मिले सुझाव के आधार पर और बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम, 1988 और या धन शोधन रोधक अधिनियम के तहत शेयर पर रोक लगाने और उससे जुड़ी प्रशासनिक चुनौतियों को कम करने के लिये उपरोक्त प्रावधान को खत्म करने का निर्णय लिया गया है।

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सेबी ने मई में जारी सर्कुलर में बदलाव करते हुए कहा कि उसने 'फ्रीजिंग' शब्द का संदर्भ हटा लिया है। मार्केट रेगुलेटर ने इससे पहले मार्च में सभी डीमैट अकाउंट होल्डर के लिए नामांकन डिक्लेरेशन जमा करना या नामांकन से बाहर निकलना 30 सितंबर तक अनिवार्य कर दिया था।