भारतीय शेयर बाजार के रेगुलेटर SEBI की आज मुंबई में एक बेहद अहम बैठक होने जा रही है। इस मीटिंग में तीन बड़े नीतिगत बदलावों पर मुहर लग सकती है, जिनमें ओपन-मार्केट बायबैक और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) के रिव्यू को तेज करना शामिल है। इस पहल का मकसद मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ाना और रेगुलेटरी प्रक्रियाओं को आसान बनाना है। निवेशकों का मानना है कि इन फैसलों से भारतीय इक्विटी मार्केट में ट्रेडिंग की रणनीति पूरी तरह बदल सकती है।

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प्रस्तावों में से एक ओपन-मार्केट बायबैक को फिर से शुरू करना है, ताकि कंपनियां अपनी पूंजी का बेहतर प्रबंधन कर सकें। इस तरीके से कंपनियां सीधे स्टॉक एक्सचेंज से अपने शेयर खरीद सकेंगी। बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान यह शेयरों की कीमतों को स्थिर रखने में मदद करेगा। इससे बड़ी कंपनियों के लिए अपने शेयरधारकों को सरप्लस कैश लौटाना आसान हो जाएगा। जानकारों का मानना है कि टेंडर ऑफर की तुलना में इसमें कागजी कार्रवाई और प्रशासनिक बोझ काफी कम होगा।

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SEBI ओपन-मार्केट बायबैक और AIF लॉन्च के तेज होने का क्या होगा असर?

म्यूचुअल फंड्स को अचानक आने वाली नकदी की जरूरतों को पूरा करने के लिए 'इंट्राडे बॉरोइंग' (दिन के भीतर उधार लेना) की अनुमति मिल सकती है। फिलहाल, फंड्स को नकदी के तालमेल में कमी का सामना करना पड़ता है, जिसका असर उनके डेली नेट एसेट वैल्यू (NAV) पर पड़ता है। शॉर्ट-टर्म उधार मिलने से रिटेल निवेशकों के पेमेंट के लिए एक सुरक्षा कवच मिल जाएगा। इस कदम से फंड्स को मजबूरी में अपने एसेट्स नहीं बेचने पड़ेंगे, जिससे अक्सर लॉन्ग-टर्म परफॉर्मेंस पर बुरा असर पड़ता है। हालांकि, एक दिन में फंड कितना उधार ले सकता है, इसके लिए कुछ सुरक्षा नियम और सीमाएं तय की जा सकती हैं।

पॉलिसी का क्षेत्रमौजूदा स्थितिप्रस्तावित बदलाव
बायबैक नियमटेंडर रूट पर फोकसओपन-मार्केट की वापसी
AIF लॉन्चमैन्युअल रिव्यू में देरीफास्ट-ट्रैक एलिजिबिलिटी
फंड लिक्विडिटीसिर्फ लॉन्ग-टर्म कर्जइंट्राडे उधार की सुविधा

रेगुलेटर अनुभवी और योग्य मैनेजर्स के लिए AIF लॉन्च की प्रक्रिया को भी फास्ट-ट्रैक करने की तैयारी में है। इससे नई स्कीम्स को बाजार में उतारने का वेटिंग पीरियड कम हो जाएगा। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद जल्द ही इसके आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिए जाएंगे। ये सुधार दिखाते हैं कि सेबी भारत को एक प्रतिस्पर्धी निवेश केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इन डिजिटल-फर्स्ट नियमों के लागू होने के साथ पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जाएगी।