नयी दिल्ली। देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई के ग्राहकों के लिए एक अहम खबर है। यदि आपका भी खाता एसबीआई में है तो अलर्ट हो जाएं। दरअसल आज 14 मार्च को एसबीआई के ग्राहक यूपीआई पेमेंट नहीं कर पाएंगे। एसबीआई ग्राहकों को यूपीआई पेमेंट करने में समस्या आएगी। इस बात की जानकारी खुद एसबीआई की तरफ से दी गयी है। मालूम हो कि पहले के मुकाबले भारत में यूपीआई ट्रांजेक्शन का इस्तेमाल कई गुना बढ़ गया है। एसबीआई के प्लेटफॉर्म से भी रोजाना बड़ी संख्या में यूपीआई लेन-देन होती हैं। मगर आज एसबीआई ग्राहकों को यूपीआई पेमेंट में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।
एसबीआई ने बताया है कि वे अपने यूपीआई प्लेटफॉर्म को अपग्रेड कर रहा है, जिसके चलते ट्रांजेक्शन में रुकावट आ सकती है। एसबीआई ने कहा कि उसके ग्राहकों को 14 मार्च को अपग्रेड वर्क के कारण बैंक की यूपीआई सेवा का उपयोग करने में समस्या आएगी। ऐसा पहली बार नहीं है जब अपग्रेड वर्क के कारण एसबीआई ने अलर्ट जारी किया है। बल्कि पिछले साल भी भी बैंक की तरफ से कई बार ऐसे अलर्ट जारी किए गए थे।
यदि आप एसबीआई ग्राहक हैं और यूपीआई पेमेंट करना चाहते हैं तो आपके पास कई और ऑप्शन हैं। एसबीआई ने जानकारी दी है कि कि उपयोगकर्ता यूपीआई पेमेंट के विकल्प के रूप में बैंक के अन्य डिजिटल चैनलों का उपयोग कर सकते हैं। एसबीआई ग्राहक 14 मार्च को योनो, योनो लाइट, नेट बैंकिंग या एटीएम (डेबिट कार्ड) के माध्यम से लेनदेन कर सकते हैं।
देश के सबसे बड़े सार्वजनिक बैंक ने अपने ग्राहकों को सूचित करने के लिए ट्विटर का सहारा लिया। एसबीआई ने अपग्रेडेशन वर्क के बीच बैंक के साथ सपोर्ट करने का अनुरोध किया। एसबीआई का उद्देश्य अपने ग्राहकों को बिना रुकावट बैंकिंग एक्सपीरियंस प्रदान करना है और इसीलिए ये अपनी सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
एसबीआई ने ग्राहकों को सुझाव दिया कि वे बैंक के अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ट्रांजेक्श कर सकते हैं। इनमें योनो, योनोलाइट और नेट बैंकिंग शामिल हैं। ये सभी चैनल अपग्रेड गतिविधि से प्रभावित नहीं होंगे।
बता दें कि अगले दो दिन बैंक हड़ताल रहेगी। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू), नौ यूनियनों का एक मुख्य समूह, ने दो सरकारी बैंकों के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ पहले ही मार्च में दो दिन की हड़ताल का ऐलान किया था। यूएफबीयू ने बताया था कि दो दिनों की ये हड़ताल 15 मार्च से शुरू होगी। 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विनिवेश योजना के तहत दो सरकारी बैंकों के निजीकरण की घोषणा की थी। सरकार 2019 में पहले ही आईडीबीआई बैंक को प्राइवेट कर चुकी है। इसके लिए एलआईसी को बैंक की ज्यादातर हिस्सेदारी बेची गयी थी। साथ ही 14 सरकारी बैंकों का पिछले सालों में आपस में विलय कर दिया गया है। एफबीयू की एक बैठक के दौरान अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) के महासचिव सी एच वेंकटचलम ने कहा था कि बैंकों के निजीकरण के सरकार के फैसले का विरोध करने का निर्णय लिया गया।
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