नई दिल्ली, मई 19। देश इस समय बड़े पैमाने पर कोरोनावायरस संकट से जूझ रहा है। लेकिन बैंकिंग सेवाएं बाधित नहीं हुई हैं। मगर अब देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपनी सेवाओं में कुछ बदलाव किए हैं, जिसमें शाखाओं के खुलने और बंद होने के समय में बदलाव शामिल हैं। साथ ही बैंक अब सेलेक्टिव यानी चुनिंदा काम ही करेगा। आइए जानते हैं पूरी डिटेल।

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कब से कब तक होगा काम

ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि ग्राहक जरूरी काम के लिए ही बैंकों में जाएं। साथ ही एसबीआई की शाखाएं 31 मई तक सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे के बीच काम करेंगी। मगर बैंक शाखाएं दोपहर 2 बजे तक बंद हो जाएंगी। अगर आपको बेहद जरूरी काम है तो ही बैंक में जाएं और वो भी 10 बजे के बाद और 1 बजे से पहले-पहले।

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आधे कर्मचारी करेंगे काम

एसबीआई की शाखा अब सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक खुलेगी। नई अधिसूचना में यह भी बताया गया है कि बैंक का एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिस पहले की तरह बैंकिंग वर्किंग समय के दौरान 50 प्रतिशत स्टाफ सदस्यों के साथ काम करता रहेगा। बैंक शाखा में आधे कर्मचारी ही करेंगे। बैंक शाखा में जाने वाले ग्राहकों को मास्क पहनना अनिवार्य है वरना उन्हें प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।

होंगे सिर्फ 4 काम

एसबीआई के वेरिफाइड ट्विटर अकाउंट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बैंकों में फिजिकली सिर्फ चार काम होंगे। इनमें 1) कैश जमा करना और निकालना, 2) चेक संबंधी कार्य, 3) डीडी/एनईएफटी/आरटीजीएस से संबंधित कार्य और 4) सरकारी चालान शामिल है। ग्राहकों से अनुरोध किया गया है कि बाकी सभी चीजों के लिए एसबीआई की फोन बैंकिंग सेवा का लाभ उठाएं। इसका इस्तेमाल करने से पहले आपको एसबीआई की फोन बैंकिंग सेवा के लिए रजिस्ट्रेशन कराना होगा।

यहां भी सिर्फ 4 घंटे काम

इससे पहले पिछले गुरुवार से तेलंगाना भर में बैंक शाखाएं सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक चार घंटे ही खुले रहने का ऐलान किया गया था। तेलंगाना में लागू हुए 10 दिनों के लॉकडाउन के मद्देनजर राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की एक विशेष बैठक में सदस्य बैंकों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया था। इस समय देश में रोज कोरोना के काफी अधिक मामले आ रहे हैं। इसलिए ही राज्य सरकारें और बाकी संस्थान ऐसे उपाय कर रहे हैं।

पिछले महीने किया था तय

एसएलबीसी ने पिछले महीने शाखाओं के काम के घंटों में कमी का फैसला किया था। ये फैसला कोविड-19 मामलों की संख्या में वृद्धि के कारण लिया गया था। कुछ भारतीय बैंक संघ ने इसके लिए सिफारिश की थी। लेकिन इसके लिए सरकार की मंजूरी चाहिए थी।