नयी दिल्ली। वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ने लगातार 13वें साल में भारत की संप्रभु रेटिंग को 'बीबीबी-' के सबसे निचले निवेश ग्रेड में बरकरार रखा। बल्कि एसएंडपी ने कहा है कि अर्थव्यवस्था और राजकोषीय स्थिति स्थिर हो जाएगी और 2021 से ठीक होनी शुरू होगी। एसएंडपी ने अपना आउटलुक 'स्थिर' रखा है, मगर इसने चेताया भी है कि लंबी अवधि की ग्रोथ के लिए जोखिम बढ़ रहा है। भारत की रेटिंग इसकी औसत से अधिक रियल जीडीपी ग्रोथ को दर्शाती है। एसएंडपी ने शॉर्ट टर्म विदेशी और स्थानीय मुद्रा सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को 'A-3' रेटिंग दी है। जानकारी के लिए बता दें कि फिच रेटिंग्स ने भी भारत के लिए स्थिर आउटलुक के साथ 'बीबीबी-' रेटिंग दी है। फिच रेटिंग्स के अनुसार 2020-21 में भारत की जीडीपी में 5 फीसदी की गिरावट आ सकती है, मगर अगले वित्त वर्ष में 9.5 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है।

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जीडीपी के लिए एसएंडपी का अनुमान
एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने भारत की अर्थव्यवस्था में चालू वित्त वर्ष में 5 फीसदी गिरावट का अनुमान लगाया है। हालांकि इसने 2021-22 में जीडीपी विकास दर के लिए 8.5 फीसदी और 2022-23 में 6.5 फीसदी का अनुमान लगाया है। बता दें कि 2019-20 में देश की जीडीपी 4.2 फीसदी की दर से बढ़ी, जो पिछले 11 सालों में सबसे कम है। एसएंडपी ने कहा है कि कोरोना की आर्थिक मार से भारत की कमजोर राजकोषीय रूपरेखा और खराब होगी, लेकिन देश अगले तीन वर्षों में मजबूती की राह में अग्रसर होगा।

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भारतीय अर्थव्यवस्था करेगी वापसी
एसएंडपी के अनुसार स्थिर आउटलुक दर्शाता है कि कोरोना महामारी के बाद भारत की इकोनॉमी रफ्तार पकड़ेगी। स्थिर आउटलुक यह भी बताता है कि सरकार का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2021 में कई सालों के ऊंचे लेवल पर पहुंचने के बाद स्पष्ट रूप से घटेगा। एसएंडपी ने कहा कि महामारी से उत्पन्न हुई वैश्विक आर्थिक मंदी के साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर महामारी को फैलने से रोकने के लिए किए गए सख्त उपायों से अर्थव्यवस्था को कड़ी चोट लगी है। भारत की कम प्रति व्यक्ति आय इसके मजबूत आर्थिक विकास आउटलुक पर दबाव बढ़ाता है।

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