RPF Rescued Children: आरपीएफ ने पिछले सात सालो में रेल स्टेशन और ट्रेनों से 84,119 बच्चों को गलत हाथों में जाने से बचाया है और बच्चों को नई जिंदगी दी है। रेल मंत्रालय के मुताबिक, पिछले सात सालों (2018- मई 2024) में, आरपीएफ ने स्टेशनों और ट्रेनों में खतरे में पड़े 84 हजार 119 बच्चों को बचाया गया है।

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इस साल में शुरु हुआ था ये मिशन

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2018 में इस मिशन की शुरुआत हुई। 2018 में आरपीएफ ने कुल 17,112 पीडि़त बच्चों को बचाया था। इसमें वो बच्चे भी शामिल हैं जो घर से भागे थे, लापता, बिछड़े हुए, निराश्रित, अपहृत मानसिक रूप से कमजोर और बेघर बच्चे भी हैं।

हर साल इतने बच्चों को किया गया सुरक्षित

रेल मंत्रालय ने हर साल वर्षवार आंकड़े की जानकारी देते हुए बताया है कि वर्ष 2019 में कुल 15,932 बच्चों को बचाया गया है। साल 2020 कोविड महामारी की चुनौतियों के बावजूद 5,011 बच्चों को बचाया गया। वहीं साल, 2021 में 11,907, साल 2022 में 17,756 और 2023 में 11,794 बच्चों को बचाया गया।

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बच्चों के लिए जीवन रेखा है 'नन्हे फरिश्ते' ऑपरेशन

रेल मंत्रालय ने इसकी तारीफ करते हुए कहा कि 'नन्हे फरिश्ते महज एक अभियान नहीं है। साथ ही, यह उन हजारों बच्चों के लिए जीवन रेखा है जो खुद को अनिश्चित परिस्थितियों में पाते हैं। 2018 से 2024 तक के आंकड़े रेलवे सुरक्षा बल के अटूट समर्पण की कहानी को दर्शाते हैं।

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घर से भागने वाले बच्चे सबसे अधिक

रेल मंत्रालय के अनुसार, बचाए गए 17 हजार 112 बच्चों में से 13 हजार 187 बच्चों की पहचान घर से भागे हुए बच्चों के रूप में की गई है, वहीं 2105 लापता बच्चों की संख्या चिंताजनक है।

बच्चों को माता-पिता तक पहुंचाया जाता है

भारतीय रेलवे ने 135 से अधिक रेलवे स्टेशनों पर चाइल्ड हेल्पडेस्क स्थापित किए हैं। रेल मंत्रालय ने यह जानकारी भी दी है कि आरपीएफ बचाए गए बच्चों को जिला बाल कल्याण समिति को सौंप देती है। जिला बाल कल्याण समिति बच्चों को उनके माता-पिता तक पहुंचाती है।

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अपने प्रयासों के माध्यम से, आरपीएफ ने न केवल बच्चों को बचाया है, बल्कि घर से भागे हुए और लापता बच्चों की दुर्दशा के बारे में जागरूकता भी बढ़ाई है, जिससे आगे की कार्रवाई और विभिन्न हितधारकों से समर्थन प्राप्त हुआ है। यह अभियान लगातार विकसित हो रहा है, नई चुनौतियों के अनुकूल हो रहा है और भारत के विशाल रेलवे नेटवर्क में बच्चों के लिए एक सुरक्षित वातावरण बनाने का प्रयास कर रहा है। प्रत्येक बचाव समाज के सबसे कमज़ोर सदस्यों की सुरक्षा के लिए RPF की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।