नई दिल्ली, अगस्त 1। चावल की कीमत लगातार बढ़ रही है और आने वाले दिनों में इसका गरीबों की थाली तक पहुंचना भी मुश्किल हो सकता है। चावल की कीमतों में बढ़ोतरी की दो मुख्य वजह है एक तो एक पड़ोसी मुल्क और पश्चिम एशिया ने इसके आयात करने के लिए हाय-तौबा मचा रखी है और दूसरी ओर धान उत्पादक राज्यों में इसके बीजों की बुआई के लायक बारिश ही नहीं हो रही है। किसानों को बहुत परेशानी हो रही हैं, उनके बीज खराब हो रहे हैं।
विदेशों में गेंहू की ज्यादा मांग के कारण गेंहू की कीमतों में बढ़ोतरी तो हो ही रही है साथ ही साथ अब चावल के दाम भी बहुत बढ़ रहे है। जून से अभी तक चावल को कीमतों में बढ़ोतरी को बात करे तो 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो चुकी है। चावल का देश में मुख्य रूप से उपयोग किया जाता है और बढ़ती चावल की कीमतों से आम आदमी को भी बहुत प्रभावित करेगा। आने वाले दिनों में चावल की कीमतों में और बढ़ोतरी होने के आसार हैं।
बहुत से राज्यों में बारिश ने किसानों का साथ नहीं दिया है और यही कारण है कि चावल की कीमत के लगातार बढ़ रही है इसी कारण पिछले साल के मुकाबले इस साल चावल की बुवाई में काफी कमी देखने को मिली है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 29 जुलाई तक पिछले साल की तुलना में 13.3 प्रतिशत क्षेत्र में धान की बुआई नहीं हो पाई थी।
जहा बारिश की वजह से किसानों के बीज खराब हो रहे है और दूसरी तरफ विदेशो से निर्यात की बढ़ती मांग ने इसकी कीमतों में और भी ज्यादा बढ़ोतरी की स्थिति पैदा कर दी है। बीवी कृष्णा राव जो चावल निर्यातक संघ के अध्यक्ष है उन्होंने कहा, 'बांग्लादेश ने भारत से चावल का आयात करना शुरू कर दिया है, जिसने भारतीय घरों में चावल की पसंदीदा किस्मों जैसे कि सोना मसूरी को प्रभावित किया है, जिनकी कीमतों में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।'
1,120 लाख टन चावल उत्पादन का लक्ष्य
कोलकाता के तिरुपति एग्री ट्रेड के सीईओ सूरज अग्रवाल ने कहा 'धान की सभी किस्मों की कीमतें तीस प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। धान की रत्ना वेरायटी, जो पहले 26 रुपये किलो का था, अब 33 रुपये किलो तक हो गया है। बासमती चावल के दाम भी लगभग तीस प्रतिशत बढ़ गए हैं, 62 रुपये किलो से 80 रुपये । हालांकि खरीब सीजन में 1,120 लाख टन चावल उत्पादन का लक्ष्य 2022 के वित्त वर्ष में भारत में सर्दियों की फसल समेत चावल का उत्पादन 1,300 लाख टन रहा था और 210 लाख टन का निर्यात किया गया था। इस साल खरीफ सीजन के दौरान भारत 1,120 लाख टन चावल उत्पादन का लक्ष्य लेकर चल रहा है।
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