Regular vs Direct Mutual Funds: जब डायरेक्ट और रेगुलर म्यूचुअल फंड प्लान के बीच की बात आती है तो निवेशक अक्सर उलझन में पड़ जाते हैं। मुख्य अंतर कमीशन या ब्रोकरेज फीस की भागीदारी में होता है। डायरेक्ट प्लान में ये फीस शामिल नहीं होती, जबकि रेगुलर प्लान में होती है। चलिए आपको बताते हैं कि डायरेक्ट और रेगुलर म्यूचुअल फंड प्लान के बीच क्या अंतर होता है।
Advertisement
- इकॉनमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सेंटर फॉर इंवेस्टमेंट एजुकेशन एंड लर्निंग के गिरिजा गादरे, आरती भार्गव और लब्धि मेहता के अनुसार, डायरेक्ट प्लान सीधे फंड हाउस से उपलब्ध होते हैं। इसके विपरीत, रेगुलर प्लान वित्तीय सलाहकारों, बैंकों या एनबीएफसी के माध्यम से खरीदे जाते हैं। म्यूचुअल फंडों के डायरेक्ट प्लान में कोई कमीशन या ब्रोकरेज शामिल नहीं होता है। वहीं, रेगुलर प्लान में इसे वसूला जाता है।
- डायरेक्ट प्लान में कोई कमीशन या ब्रोकरेज शामिल नहींहोती है तो, इसलिए वे नियमित योजनाओं की तुलना में सस्ते होते हैं। रेगुलर प्लान के लिए कमीशन का भुगतान करना पड़ता है, जिससे उनकी कुल लागत बढ़ जाती है।
- एक्सपेंस रेशियो एक और पॉइंट है जिसकी वजह से इनके बीच अंत होता हैं। कमीशन की अनुपस्थिति के कारण डायरेक्ट प्लान का एक्सपेंस रेशियो कम होता है। नतीजतन, रेगुलर प्लान का एक्सपेंस रेशियो अधिक होता है क्योंकि उनमें कमीशन शामिल होता है। यह नेट एसेट वैल्यू (NAV) को भी प्रभावित करता है, जो आम तौर पर रेगुलर प्लान की तुलना में डायरेक्ट प्लान में अधिक होता है।
- अपने कम एक्सपेंस रेशियो के कारण, डायरेक्ट प्लान आम तौर पर नियमित प्लान की तुलना में ज़्यादा रिटर्न देते हैं। बेहतर रिटर्न चाहने वाले निवेशक इस कारण से डायरेक्ट प्लान को प्राथमिकता दे सकते हैं।
- डायरेक्ट प्लान और रेगुलर प्लान दोनों ही कैपिटल गेन टैक्स के अधीन हैं, जो कि होल्डिंग पीरियड और फंड के प्रकार (इक्विटी, ऋण, आदि) पर निर्भर करता है। रेगुलर प्लान उन लोगों के लिए अधिक बेहतर हो सकती हैं जो प्रोफेशनल मार्गदर्शन पसंद करते हैं, निवेश के लिए नए हैं, या स्वतंत्र रूप से निवेश का चयन और प्रबंधन करने के समय लेने वाले कार्य से बचना चाहते हैं।
More Articles
- भारी बारिश का अलर्ट: बाढ़ में डूबी कार को स्टार्ट न करें, क्लेम पाने का सही तरीका जानें
- Manipal Health IPO: ₹9,275 करोड़ का बड़ा दांव, क्या आपको अप्लाई करना चाहिए?
- ITR फाइल करने का आज आखिरी मौका: क्या आज के बाद लगेगा जुर्माना? जानें बचने का तरीका
- US Fed का फैसला आज रात: क्या भारतीय बाजार में आएगी बड़ी हलचल? जानें ट्रेडर्स के लिए खास रणनीति
- GST QRMP स्कीम: PMT-06 पेमेंट में 35% चालान चुनें या सेल्फ-असेसमेंट? ब्याज से बचने का पूरा गणित
- ITR फाइलिंग की डेडलाइन: 31 जुलाई से पहले निपटा लें ये जरूरी काम, वरना होगा नुकसान