भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अहमदाबाद स्थित कलर मर्चेंट्स को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया है। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि बैंक के पास पर्याप्त पूंजी और भविष्य में कमाई की संभावना नहीं है। इसके अलावा, इसने बैंकिंग विनियमन अधिनियम के तहत कुछ शर्तों का पालन नहीं किया है। RBI की यह कार्रवाई देश भर के बैंकों पर सख्त निगरानी बनाए रखने की उसकी मजबूती को दिखाता है।

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बैंक लगातार ऐसे हालात में काम कर रहा था जिससे जमाकर्ताओं के पैसे खतरे में पड़ सकते थे। इसी वजह से RBI को यह कदम उठाना पड़ा। इस फैसले से यह साफ होता है कि रिजर्व बैंक देश में बैंकों की निगरानी को लेकर गंभीर है और वित्तीय सिस्टम की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।

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नियमों का नहीं किया पालन

आरबीआई ने कहा कि बैंक ने बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 के कई नियमों का पालन नहीं किया। यह नियम हर बैंक के लिए जरूरी होते हैं ताकि वे पारदर्शिता, सुरक्षा और विश्वसनीयता के साथ काम कर सकें। जब कोई बैंक इन नियमों का पालन नहीं करता, तो ग्राहकों के हितों को खतरा होता है।

आरबीआई ने कई बार बैंक को सुधरने का मौका दिया था, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं आया। आखिरकार, बैंक का लाइसेंस रद्द करना ही एकमात्र रास्ता बचा था।

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ग्राहकों को DICGC से मिलेगा पैसा

बैंक बंद होने की खबर से ग्राहकों में चिंता होना जरूरी है, लेकिन राहत की बात यह है कि उनके जमा पैसों की सुरक्षा के लिए डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) मदद करेगा।

DICGC के तहत प्रत्येक जमाकर्ता को अधिकतम 5 लाख रुपए तक की राशि बीमा के तौर पर दी जाती है। बैंक के आंकड़ों के अनुसार, करीब 98.51% जमाकर्ता इस बीमा राशि के दायरे में आते हैं, यानी उन्हें अपनी पूरी जमा राशि वापस मिलने की संभावना है।

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कई जमाकर्ताओं को मिल चुका है पैसा

RBI की रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2024 तक DICGC ने पहले ही 13.94 करोड़ रुपए की राशि जमाकर्ताओं को बांट दी है। यह राशि उन ग्राहकों को दी गई है, जिन्होंने अपने दावे पहले ही प्रस्तुत किए थे।

इससे यह साबित होता है कि DICGC सक्रिय रूप से काम कर रहा है और ग्राहकों को उनका पैसा सुरक्षित और समय पर लौटाने की कोशिश की जा रही है।

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राज्य सरकार से सहयोग की मांग

आरबीआई ने गुजरात राज्य की सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार से अपील की है कि वे इस बैंक को बंद करने का औपचारिक आदेश जारी करें। इसके साथ ही एक लिक्विडेटर यानी परिसमापक की नियुक्ति की जाएगी जो बैंक की संपत्तियों और लेन-देन का निपटारा करेगा।

इस तरीके से यह तय किया जाएगा कि बैंक के काम करने के तरीके को व्यवस्थित रूप से बंद किया जाए और ग्राहकों को उनकी राशि समय पर मिले।

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अन्य बैंकों के लिए भी अपडेट

इस घटना से बाकी सहकारी बैंकों को भी एक कड़ा संदेश जाता है। आरबीआई साफ कर चुका है कि जो बैंक नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इससे यह भी पता चलता है कि भारत में बैंकिंग सिस्टम को सुरक्षित बनाए रखने के लिए नियामक एजेंसियां पूरी तरह से सतर्क हैं और ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठा रही हैं।