RBI new UCB license 2026: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शहरी सहकारी बैंकों को लेकर एक अहम संकेत दिया है। करीब दो दशक बाद अब फिर से नए शहरी सहकारी बैंकों को लाइसेंस देने पर विचार किया जा रहा है। साल 2004 के बाद यह प्रक्रिया लगभग बंद कर दी गई थी, क्योंकि उस दौर में कई नए बैंक कुछ ही समय में कमजोर साबित हुए थे और आम लोगों की जमा पूंजी पर खतरा पैदा हो गया था।

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क्यों बदला RBI का नजरिया

RBI का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में सहकारी बैंक सेक्टर में काफी सुधार देखने को मिला है। नियमों को सख्त किया गया, निगरानी बढ़ाई गई और जो बैंक कमजोर थे, उन्हें या तो दूसरे बैंकों में मिला दिया गया या फिर उनका लाइसेंस रद्द कर दिया गया। इसी वजह से अब यह माना जा रहा है कि अगर मजबूत आधार वाले नए बैंक आएं, तो वे लोगों के लिए बेहतर सेवाएं दे सकते हैं।

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चर्चा पत्र के जरिए मांगी गई राय

इस विषय पर RBI ने एक चर्चा पत्र जारी किया है। इसमें आम जनता, बैंकिंग से जुड़े विशेषज्ञों और संस्थाओं से सुझाव मांगे गए हैं। लोग 13 फरवरी 2026 तक अपनी राय भेज सकते हैं। RBI यह जानना चाहता है कि क्या मौजूदा हालात नए शहरी सहकारी बैंकों के लिए सही हैं और अगर हां, तो किन शर्तों के साथ उन्हें मंजूरी दी जानी चाहिए।

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नए बैंकों के लिए सख्त शर्तें

इस बार RBI कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। प्रस्ताव के अनुसार, नए बैंक शुरू करने के लिए कम से कम 300 करोड़ रुपए की पूंजी जरूरी होगी। इसके अलावा, सहकारी संस्था का कम से कम 10 साल का अनुभव और पिछले कई सालों का अच्छा रिकॉर्ड होना चाहिए। बैंक की आर्थिक सेहत मजबूत रखने पर भी खास ध्यान दिया जाएगा।

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लोगों के पैसे की सुरक्षा प्राथमिकता

RBI ने साफ किया है कि उसका सबसे बड़ा टारगेट जमाकर्ताओं की सुरक्षा है। इसलिए वही बैंक मंजूरी पाएंगे जो लंबे समय तक टिक सकें और भरोसे के साथ काम करें। फिलहाल देश में 1400 से ज्यादा शहरी सहकारी बैंक काम कर रहे हैं, जिनसे लाखों लोग जुड़े हैं।

आगे क्या हो सकता है

अब सब कुछ चर्चा पत्र पर मिलने वाले सुझावों पर निर्भर करेगा। इन्हीं के आधार पर RBI अंतिम फैसला लेगा। अगर मंजूरी मिलती है, तो आने वाले समय में मजबूत और भरोसेमंद नए शहरी सहकारी बैंक देश में देखने को मिल सकते हैं।