RBI : रिजर्व बैंक ने ईएमआई के बारे में शुक्रवार को नई गाइडलाइन जारी की। इस गाइडलाइन में कर्जदारों को कई तरह की राहत दी गई है लेकिन इसके साथ ही एक परेशानी वाली बात भी है।

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नए नियमों के आने के बाद ब्याज दर बढ़ने पर बैंक और फाइनेंस कंपनियां कुछ होम लोन पर किस्त बढ़ाने पर मजबूर हो सकती हैं। इसके साथ ही लोन लेने वालों के लिए राशि भी घट जाएगी।

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नए नियम के अनुसार लोन लेने वालों को इंट्रेस्ट रेट में बदलाव होने पर फिक्स्ड रेट लोन में शिफ्ट करने का ऑप्शन दिया जायेगा। बैंक मौजूदा रेट से अधिक रेट पर रिपेमेंट कैपेसिटी कैलकुलेट करेंगे।

जिस वजह से लोन लेने वालों के लिए लोन की राशि कम हो सकती है। पारदर्शिता लाने के लिए नए रूल 31 दिसंबर से नए और मौजूदा कर्जदारों के लिए लागू होंगे।

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अगर ब्याज दर काफी तेजी से बढ़ता है तो फिर बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कि ईएमआई लोन पर मासिक ब्याज को कवर करना जारी रखे और किस्त देने के बाद बकाया रहा में इजाफा न हो।

लोन मंजूरी के लेटर में यह क्लियर करना होगा कि फ्लोटिंग से फिक्स्ड रेट में जाने पर कितना चार्ज लगेगा। अभी बैंक मौजूदा ब्याज दरों के आधार पर कर्जदार की लोन चुकाने की कैपेसिटी को कैलकुलेट करते हैं।

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पिछले सप्ताह केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की तरफ से कहा गया था कि सेंट्रल बैंक ईएमआई नियमों की समीक्षा करेगा। नए नियमों के अनुसार बैंक को रिकवर किए गए। प्रिंसिपल और इंटरेस्ट, ईएमआई अमाउंट, बचे हुई किस्तों की संख्या और ब्याज की वार्षिक दर का खुलासा करना होगा।

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अमूमन बैंक लोन लेने वाले की योजना का आकलन आय में बढ़ोतरी ब्याज दर के साइक्लिक नेचर के आधार पर करते हैं लेकिन कई सारे ऐसे मामले भी सामने आए हैं जहां कुछ इंडस्ट्रीज में महंगाई के हिसाब से वेतन नहीं बढ़ी है।

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