भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक इस हफ्ते शुरू हो रही है। 5 जून को होने वाले बड़े ऐलान पर देश के करोड़ों निवेशकों की नजरें टिकी हैं। महंगाई के मौजूदा आंकड़ों को देखते हुए माना जा रहा है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। ऐसे में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर ज्यादा रिटर्न पाने की चाहत रखने वालों के लिए यह निवेश करने का सबसे सही समय हो सकता है।
फिलहाल कई बैंक अपनी FD स्कीमों पर 7 से 8 फीसदी तक ब्याज दे रहे हैं। सुरक्षित निवेश पसंद करने वाले लोगों के लिए पिछले कुछ सालों में यह सबसे बेहतरीन रिटर्न है। अगर MPC भविष्य में ब्याज दरों में कटौती का संकेत देती है, तो बैंकों के ये शानदार ऑफर जल्द ही खत्म हो सकते हैं। ऐसे में निवेशकों को तय करना होगा कि वे अभी निवेश करें या थोड़ा और इंतजार करें।
बैंक FD दरों पर RBI की पॉलिसी का असर
FD में जहां पैसा निकालना आसान (लिक्विडिटी) होता है, वहीं छोटी बचत योजनाएं सुरक्षा के मामले में बेजोड़ हैं। सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) फिलहाल 8.2 फीसदी का दमदार रिटर्न दे रही है। वहीं, टैक्स फ्री होने की वजह से पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) आज भी लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। ये विकल्प न केवल आपकी पूंजी को सुरक्षित रखते हैं, बल्कि रिटायरमेंट के बाद नियमित आय भी सुनिश्चित करते हैं।
नीचे दी गई टेबल में भारत की कुछ पॉपुलर निवेश योजनाओं की मौजूदा ब्याज दरों की तुलना की गई है। इससे आपको बैंक और सरकारी स्कीमों के बीच सही चुनाव करने में मदद मिलेगी। आप अपनी जरूरत और टैक्स बचत के हिसाब से बेस्ट ऑप्शन चुन सकते हैं।
| स्कीम का नाम | ब्याज दर | टैक्स बेनिफिट |
|---|---|---|
| पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) | 7.1% | EEE स्टेटस |
| सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) | 8.2% | धारा 80C |
| बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) | 7.0% - 8.0% | टैक्सेबल |
| किसान विकास पत्र (KVP) | 7.5% | टैक्सेबल |
RBI के फैसले से पहले PPF या SCSS का चुनाव
किसी भी निवेश से होने वाली असल कमाई में टैक्स की बड़ी भूमिका होती है। FD से मिलने वाले ब्याज पर आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है, जिससे आपका मुनाफा कम हो सकता है। इससे बचने के लिए 'लैडरिंग स्ट्रैटेजी' अपनाना एक अच्छा विचार हो सकता है, जिसमें आप अपने फंड को अलग-अलग समय सीमा के लिए निवेश करते हैं। इससे जरूरत पड़ने पर आपके पास नकदी भी रहती है और अगर भविष्य में दरें बढ़ती हैं, तो आप फिर से निवेश कर सकते हैं।
RBI की बैठक से पहले ऊंचे ब्याज वाली स्कीमों में पैसा लगाना समझदारी भरा फैसला हो सकता है। भले ही केंद्रीय बैंक अभी दरों को स्थिर रखे, लेकिन लंबी अवधि में इनके घटने के आसार ज्यादा हैं। ऐसे में SCSS या लॉन्ग टर्म FD के जरिए मौजूदा दरों को लॉक करना आपके भविष्य की कमाई को सुरक्षित रखेगा। अपनी जरूरतों को समझें और सही फाइनेंशियल मिक्स चुनें।
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