भारत के आर्थिक कैलेंडर के लिए यह हफ्ता बेहद अहम होने वाला है। 12 मई को सरकार अप्रैल 2025 के कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) यानी खुदरा महंगाई और मार्च 2025 के इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) यानी औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े जारी करेगी। मौजूदा हालात में इन दोनों आंकड़ों की अहमियत काफी बढ़ गई है। ये आंकड़े जून में होने वाली आरबीआई (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक से पहले बाजार की उम्मीदों को दिशा देंगे। साथ ही, इनका सीधा असर आपके होम लोन की ईएमआई (EMI), बैंक एफडी (FD) की दरों, बॉन्ड यील्ड और रुपये की सेहत पर पड़ सकता है।
12 मई को आने वाले CPI और IIP आंकड़े RBI की जून पॉलिसी के लिए क्यों हैं अहम?
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने पुष्टि की है कि अप्रैल 2025 के महंगाई के आंकड़े 12 मई, 2025 को जारी किए जाएंगे। यह समय काफी महत्वपूर्ण है। आरबीआई ने अप्रैल 2025 में लगातार दूसरी बार रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की थी, जिससे यह घटकर 6 प्रतिशत पर आ गया है। पिछले पांच वर्षों में यह पहली बार है जब लगातार दो बार रेट कट किया गया है। अब सोमवार को आने वाले महंगाई और फैक्ट्री आउटपुट के आंकड़े यह तय करेंगे कि आगे ब्याज दरों में कटौती की कितनी गुंजाइश बची है।
तेजी से गिर रही है महंगाई: अप्रैल के आंकड़ों में क्या दिख सकता है?
अप्रैल 2025 के लिए हेडलाइन सीपीआई महंगाई दर 3.16 प्रतिशत रही, जो मार्च 2025 के मुकाबले 18 बेसिस पॉइंट कम है। यह जुलाई 2019 के बाद से सालाना आधार पर सबसे निचला स्तर है। खाने-पीने की चीजों की महंगाई (Food Inflation) में भी भारी गिरावट आई और यह अप्रैल 2025 में घटकर 1.78 प्रतिशत पर आ गई, जो मार्च के मुकाबले 91 बेसिस पॉइंट कम है। अक्टूबर 2021 के बाद से यह इसका सबसे निचला स्तर है। महंगाई में आ रही यह कमी उन लोगों के लिए बड़ी राहत है जो ब्याज दरों में कटौती की वकालत कर रहे हैं।
RBI का रुख और जून में रेट कट की संभावना
अप्रैल में हुई एमपीसी (MPC) की 54वीं बैठक में सर्वसम्मति से रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया गया था। घरेलू शेयर बाजार पहले ही ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद जता चुका है, क्योंकि अप्रैल की बैठक में एमपीसी ने अपना रुख 'अकोमोडेटिव' रखा था। इसका मतलब है कि आने वाले समय में या तो दरें घटेंगी या स्थिर रहेंगी, लेकिन बढ़ोतरी की संभावना फिलहाल नहीं है। अगर 12 मई को महंगाई के आंकड़े कम रहते हैं, तो जून में रेट कट की उम्मीदें और मजबूत हो जाएंगी।
IIP फैक्ट्री आउटपुट: मार्च के आंकड़ों पर एक नजर
MoSPI ने मार्च 2025 के लिए IIP के शुरुआती अनुमान जारी किए हैं, जिसमें सालाना आधार पर 3 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की गई है। यह फरवरी 2025 के 2.9 प्रतिशत (संशोधित) से थोड़ी बेहतर है। तीन मुख्य क्षेत्रों में से बिजली उत्पादन (Electricity Production) में 6.3 प्रतिशत की सबसे मजबूत बढ़त देखी गई, इसके बाद मैन्युफैक्चरिंग में 3.0 प्रतिशत और माइनिंग में 0.4 प्रतिशत की ग्रोथ रही। हालांकि, पूरे वित्त वर्ष 2024-25 के लिए कुल IIP ग्रोथ 4.0 प्रतिशत रही, जो पिछले वित्त वर्ष की 5.9 प्रतिशत ग्रोथ के मुकाबले धीमी है।
| इंडिकेटर | ताजा आंकड़े | पिछला महीना | रुझान |
|---|---|---|---|
| CPI महंगाई (अप्रैल 2025) | 3.16% | 3.34% (मार्च) | गिरावट |
| खाद्य महंगाई (अप्रैल 2025) | 1.78% | 2.69% (मार्च) | बड़ी गिरावट |
| IIP ग्रोथ (मार्च 2025) | 3.0% | 2.9% (फरवरी) | मामूली सुधार |
| RBI रेपो रेट | 6.00% | 6.25% (फरवरी) | कटौती का दौर |
होम लोन EMI और FD दरों पर क्या होगा असर?
जब आरबीआई रेपो रेट में कटौती करता है, तो एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़े होम लोन की ब्याज दरें भी कम हो सकती हैं, जिससे कर्जदारों की ईएमआई घट जाती है। रेपो-लिंक्ड होम लोन के मामले में, अगली रीसेट साइकिल (आमतौर पर एक से दो महीने) के भीतर ईएमआई कम हो सकती है। उदाहरण के तौर पर, 20 साल के लिए 1 करोड़ रुपये के लोन पर अगर ब्याज दर 8.5 प्रतिशत से घटकर 8.0 प्रतिशत हो जाती है, तो आपकी ईएमआई हर महीने करीब 6,000 रुपये कम हो सकती है। हालांकि, एफडी (FD) निवेशकों के लिए यह खबर थोड़ी निराशाजनक हो सकती है। रेपो रेट कम होने से बैंक अक्सर एफडी पर मिलने वाले ब्याज में भी कटौती कर देते हैं।
बॉन्ड यील्ड, रुपया और शेयर बाजार: 12 मई के आंकड़ों पर टिकी सबकी नजरें
डेट म्यूचुअल फंड्स के लिए रेपो रेट में कटौती बॉन्ड की कीमतों को सहारा दे सकती है, खासकर उन फंड्स के लिए जो लंबी अवधि की सिक्योरिटीज रखते हैं। अप्रैल में रेट कट के बाद बैंक निफ्टी 500 से ज्यादा अंक उछला था और 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड गिरकर 6.16 प्रतिशत पर आ गई थी। अगर 12 मई को महंगाई के आंकड़े राहत भरे रहते हैं, तो यील्ड में और गिरावट आ सकती है और जून की पॉलिसी से पहले शेयर बाजार का सेंटिमेंट भी बेहतर हो सकता है।
बाजार की उम्मीदें और किन बातों का रखें ध्यान
मार्च और अप्रैल में महंगाई दर में लगातार गिरावट देखी गई है और अप्रैल 2025 में यह करीब छह साल के निचले स्तर 3.2 प्रतिशत पर आ गई। खाद्य महंगाई में लगातार छठे महीने गिरावट दर्ज की गई, जबकि कोर महंगाई काफी हद तक स्थिर रही। विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई में कमी, मजबूत जीडीपी ग्रोथ और लिक्विडिटी के बेहतर इंतजामों से आगे और रेट कट का रास्ता साफ हो सकता है। कमोडिटी की घटती कीमतें, बेहतर सप्लाई चेन और सामान्य से अधिक मानसून के अनुमान से वित्त वर्ष 2026 में महंगाई और कम रहने की उम्मीद है।
सोमवार को जारी होने वाले ये आंकड़े महज सांख्यिकीय अपडेट नहीं हैं। अगर अप्रैल की महंगाई 4 प्रतिशत से काफी नीचे रहती है और IIP में मजबूती दिखती है, तो जून में रेट कट की संभावना प्रबल हो जाएगी। यह करोड़ों होम लोन लेने वालों के लिए खुशखबरी होगी, शेयर बाजार के निवेशकों के लिए उत्साह का संकेत होगा और एफडी धारकों के लिए एक रिमाइंडर कि वे दरें और गिरने से पहले निवेश कर लें। भारत के वित्तीय हफ्ते की शुरुआत इन दो बड़े आंकड़ों से हो रही है, और जून की पॉलिसी का नतीजा काफी हद तक इन्हीं पर निर्भर करेगा।
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