RBI : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने गुरुवार 10 अगस्त को रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने के मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) के फैसले का ऐलान करते हुए कहा है कि फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में भारतीय अर्थव्यवस्था 6.5 फीसदी की दर से बढ़ने की संभावना है।
मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने जून की बैठक में किये गए अपने अनुमानों को अपरिवर्तित छोड़ दिया है। एमपीसी ने अपनी पिछली बैठक में पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था। जिसमें पहली, दूसरी, तीसरी और चौथी तिमाही में क्रमश: 8 फीसदी, 6.5 फीसदी, 6 फीसदी, 5.7 फीसदी का अनुमान लगाया था। जिसको बरकरार रखा गया है।
रेट-निर्धारण पैनल ने सर्वसम्मति से विश्लेषकों की अपेक्षाओं के अनुरूप प्रमुख लेंडिंग रेट को स्थिर रखने का आॅप्सन चुना। एमपीसी ने लगातार तीसरी बैठक में रेपो दर को 6.50 फीसदी पर अपरिवर्तित रखा।
आरबीआई गवर्नर की तरफ से कहा गया है कि भारत के ग्रामीण इलाकों में एफएमसीजी की बिक्री में इजाफा
ग्रामीण मांग के शुरुआती पुनरुद्धार को दर्शाती है और उम्मीद है कि अच्छी खरीफ फसल के साथ इसे और बढ़ावा मिलेगा।
दास की तरफ से यह कहा गया है कि आने वाले त्यौहारों के सीजन से निजी उपभोग और निवेश गतिविधियों को समर्थन मिलने की संभावना है।
पिछली बैठक में आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की तरफ से कहा गया था कि पिछले फाइनेंशियल ईयर में
उच्च रबी फसल उत्पादन, अपेक्षित सामान्य मानसून के अलावा, और सेवाओं में लगातार उछाल से देश में निजी खपत और समग्र आर्थिक गतिविधि का समर्थन करना चाहिए।
हालांकि आरबीआई गवर्नर ने कहा कि कमजोर बाहरी मांग, अधिक वक्त तक भू-राजनीतिक तनाव, भू-आर्थिक विखंडन और पैनल के दृष्टिकोण के लिए रिस्क पैदा करते हैं।
मीडिया रिपोर्टस् के अनुसार, विश्लेषकों ने नोट किया है कि सेवाओं पीएमआई और टैक्स कलेक्शन सहित भारत के उच्च-आवृत्ति संकेतकों में मजबूत रीडिंग से आरबीआई को महंगाई से लड़ने और देश की विकास दर को बनाए रखने के लिए पर्याप्त प्राथमिकता देने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कुछ जगह मिलने की संभावना है।
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