भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 29 अक्टूबर को बंधन बैंक पर प्रमोटर की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत तक नहीं लाने के लिए 1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। आपको बता दें कि बंधन एमएफआई ने 2014 में केंद्रीय बैंक से सैद्धांतिक सार्वभौमिक बैंकिंग लाइसेंस प्राप्त किया था और अगस्त 2015 से बैंक के रूप में पूर्ण संचालन शुरू किया था।

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आरबीआई ने बीएसई फाइलिंग में कहा है कि आरबीआई ने बंधन फाइनेंशियल होल्डिंग्स लिमिटेड की शेयरधारिता को बैंक के कारोबार के शुरू होने से तीन साल के भीतर बंधन फाइनेंशियल होल्डिंग्स लिमिटेड की 40 प्रतिशत हिस्सेदारी के भुगतान में विफलता के कारण लगाया। बंधन आईपीओ लेकर आया और मार्च 2018 में सूचीबद्ध हुआ।

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यह जुर्माना आरबीआई ने एक्ट के सेक्शन 47 ए (1) (सी) और धारा 46 (4) (आई) के तहत लगाया है।

इस बारे में RBI ने बताया कि उसने बैंक को नोटिस भेजकर यह पूछा था कि उसके ऊपर लाइसेंस की गाइडलाइंस के उल्लंघन के लिए कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए। बैंक से जवाब मिलने के बाद आरबीआई ने बैंक से निजी परीक्षण की और कई दस्तावाजों की जांच करने के बाद वो इस नतीजे पर पहुंच गए कि बैंक ने लाइसेंसिंग गाइडलाइंस का पालन नहीं किया है इसलिए उस पर जुर्माना लगाना चाहिए।

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बता दें कि बैंक का हाल ही में ग्रुह फाइनेंस के साथ विलय हुआ था, जिसने प्रमोटर की हिस्सेदारी 82.26 प्रतिशत से घटाकर 60.96 प्रतिशत कर दी थी। ऋणदाता ने पहले कहा था कि शेयरधारिता को 40 प्रतिशत तक कम करने के लिए यह प्रयास कर रहा है।

कुछ दिन पहले ही बैंक की दूसरी तिमाही के नतीजों का ऐलान करते हुए बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ सी एस घोष ने इस बारे में जवाब देने से इनकार किया कि बैंक आरबीआई की गाइडलाइन्स का कब और कैसे पालन करेगा। इसी की वजह से बैंक पर कई तरह की पाबंदियां हैं जिनमें बैंक की ब्रांच बढ़ाना भी शामिल है।