नयी दिल्ली। 2020 में अब तक आरबीआई 44 बैंकों को निगरानी में ले चुका है। इसके पीछे मुख्य कारण फाइनेंशियल स्थिति में गड़बड़ी और प्रूडेंशियल नियमों का पालन न करना शामिल है। इनमें उन बैंकों के मामलों को भी शामिल किया गया है जिनकी व्यावसायिक गतिविधियों पर आरबीआई ने नए प्रतिबंध लगाए हैं। साथ ही वे मामले भी शामिल हैं जिनमें कुछ बैंकों पर पहले से कई तरह प्रतिबंध लगे हुए थे और उन्हें बढ़ा दिया गया है। इतना ही नहीं महाराष्ट्र के सीकेपी सहकारी बैंक और गोवा के मापुसा शहरी सहकारी बैंक का तो लाइसेंस तक रद्द किया गया है। आरबीआई की तरफ से की गई ये कार्रवाईयां भारत में सहकारी बैंकिंग सेक्टर के स्वास्थ्य पर अहम सवाल उठाती हैं।
सिर्फ अप्रैल में ही आरबीआई ने 9 सहकारी बैंकों पर कार्रवाई की। इसमें कमजोर वित्तीय खातों के कारण 17 अप्रैल को मापुसा का लाइसेंस रद्द करना शामिल रहा। आरबीआई ने जांच में पाया कि बैंक के पास पर्याप्त पूंजी और कमाई की संभावना नहीं है और इसका चालू रहना ग्राहकों के लिए नुकसानदेह होगा। आरबीआई ने 30 जनवरी 1998 को मापुसा को निर्धारित बैंक का दर्जा दिया था। 24 शाखाओं वाले बैंक की 2018 की वार्षिक रिपोर्ट (अंतिम उपलब्ध रिपोर्ट) के अनुसार इसके पास 2017-18 में 378 करोड़ रुपये जमा थे, जबकि इसके एडवांस 100 करोड़ रुपये के थे।
मई में 8 ऐसे मामले सामने आए जिनमें आरबीआई ने संकटग्रस्त सहकारी बैंकों पर कार्रवाई की। 2 मई को आरबीआई ने एक और बैंक को बंद करने का निर्देश दिया। इस बार मुंबई स्थित सीकेपी सहकारी बैंक का लाइसेंस रद्द हुआ। दरअसल बैंक का सकल एनपीए अनुपात 97 फीसदी पर पहुंच गया था। 1915 में स्थापित हुए और मुंबई के माटुंगा में मुख्यालय वाले इस बैंक की आठ शाखाएँ हैं जो मुंबई और ठाणे जिलों में फैली हुई हैं। सीकेपी बैंक की गलती कई अन्य असफल सहकारी बैंकों से अलग नहीं रही। इसने इसने रियल एस्टेट क्षेत्र में कुछ बड़े उधारकर्ताओं के गिर्द अपना कारोबार बनाया। इस रणनीति ने छोटे सहकारी बैंक को प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में अपनी लोन को तेजी से बढ़ाने में मदद की, लेकिन जब हालात बिगड़े तो ये रणनीति बैंक पर भारी पड़ गई।
9 महीने के बीतने के बाद भी आरबीआई अभी तक पीएमसी बैंक का कोई हल नहीं ढूंड पाया। जबकि इस दौरान आरबीआई ने बैंगलोर स्थित गुरु राघवेंद्र सहकारा (सहकारी) बैंक नियमिता, कोलकाता के कोलिकाता महिला सहकारी बैंक, पीपुल्स को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, कानपुर, उत्तर प्रदेश पर प्रतिबंध लगाए। और भी कई सहकारी बैंक आरबीआई की निगरानी में है, ऐसे में ये सवाल उठता है कि इन बैंकों में गड़बड़ी की जड़ कितनी गहरी है। मार्च 2018 तक भारत में 1,551 शहरी सहकारी बैंक (यूसीबी) थे। उस समय इन बैंकों के पास 4.5 लाख करोड़ रुपये डिपॉजिट थे। राज्य स्तर पर सहकारी बैंक तीन प्रकार के होते हैं- प्राथमिक ऋण सहकारी बैंक, जिला-स्तरीय सहकारी बैंक और राज्य-स्तरीय सहकारी बैंक। मार्च 2017 के अंत तक लगभग 33 राज्य सहकारी बैंक थे जिनमें 1.2 लाख करोड़ रुपये जमा थे, 370 जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (3.3 लाख करोड़ रुपये जमा) और 95,595 प्राथमिक कृषि ऋण सोसायटी (1.15 लाख करोड़ रुपये जमा) थे।
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