नई दिल्ली। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कोरोना वायरस महामारी के प्रभाव से जूझ रही अर्थव्यवस्था में गतिविधियां बढ़ाने के लिये मूलभूत सुविधाओं वाली परियोजनाओं में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के एक कार्यक्रम में उद्योग जगत को संबोधित करते हुये दास ने कहा कि अवसंरचना क्षेत्र के विकास में व्यापक निवेश की जरूरत है। इसमें सार्वजनिक एवं निजी दोनों क्षेत्र को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।
कृषि क्षेत्र में सुधार अच्छे
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि कृषि क्षेत्र में हाल में उठाये गये सुधार के कदमों से इस क्षेत्र में नये अवसर खुले हैं। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र आकर्षण का केन्द्र बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसी नीतियों की आवश्यकता है जिससे कि कृषि क्षेत्र की आय में निरंतर वृद्धि होती रहे। विदेशी मुद्रा विनिमय दर के बारे में दास ने कहा कि इसके लिये रिजर्व बैंक का कोई निर्धारित लक्ष्य नहीं है लेकिन जब भी इसमें अनावश्यक घटबढ़ होगी रिजर्व बैंक इस पर नजर रखेगा।
होने वाली है मौद्रिक नीति की समीक्षा
वहीं भारतीय रिजर्व बैंक ब्याज दरों में एक बार फिर कटौती कर सकता है। जानकारों के मुताबिक अगली मौद्रिक नीति समीक्षा में आरबीआई प्रमुख नीतिगत दर रेपो में 0.25 फीसदी की और कटौती कर सकता है। गौरतलब है कि आरबीआई के गवर्नर की अध्यक्षता में मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिन चलने वाली बैठक चार अगस्त से शुरू होनी है और छह अगस्त को इस बारे में कोई घोषणा की जाएगी। इस मामले में इक्रा की प्रिंसिपल इकोनॉमिस्ट अदिति नायर ने कहा है कि हम रेपो दर में 0.25 फीसदी और रिवर्स रेपो दर में 0.35 फीसदी कटौती की उम्मीद कर रहे हैं। नायर ने कहा 'हालांकि, खुदरा महंगाई एमपीसी के लक्ष्य दो-छह प्रतिशत के दायरे को पार कर गई है, लेकिन इसके अगस्त 2020 तक वापस इस सीमा के भीतर फिर आने की उम्मीद है।' ऐसी ही राय व्यक्त करते हुए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंध निदेशक और सीईओ राजकिरण राय ने कहा, '0.25 फीसदी कटौती की संभावना है या वे दर को यथावत रख सकते हैं।
खुदरा महंगाई लगातार बढ़ रही
खाद्य वस्तुओं की कीमतों में हाल में आई तेजी, खासकर मांस, मछली, अनाज और दालों की वजह से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा महंगाई जून में बढ़कर 6.09 हो चुकी है। रिजर्व बैंक खुद ही कह चुका है कि महंगाई का सुविधाजनक स्तर 4 फीसदी (इसमें 2 फीसदी प्लस या माइनस हो सकता है) ही है। यानी अब महंगाई रिजर्व बैंक के सुविधाजनक दायरे से बाहर हो चुकी है।
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