रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने देश की आर्थिक स्थिति को लेकर एक अच्छा अपडेट दिया है। उनके मुताबिक, भारत के कई मैक्रो-इकोनॉमिक इंडिकेटर्स इस समय अच्छी स्थिति में हैं और अर्थव्यवस्था पहले की तुलना में ज्यादा स्थिर दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि हाल के महीनों में कई सेक्टर की ग्रोथ मजबूत रही है, जिससे देश की आर्थिक स्पीड बनी हुई है।
अक्टूबर में मिले थे संकेत, अब दिसंबर में बड़ी उम्मीद
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने एक निजी न्यूज चैनल दिए एक इंटरव्यू में कहा पॉलिसी रेट में कटौती की संभावना पहले ही अक्टूबर एमपीसी बैठक में जताई थी। हालांकि, यह सिर्फ शुरुआती संकेत थे, अंतिम निर्णय 3 से 5 दिसंबर के बीच होने वाली बैठक में लिया जाएगा। यानी निवेशकों, बाजार और लोन लेने वालों को अगले महीने तक इंतजार करना होगा।
मल्होत्रा का कहना है कि आरबीआई पूरी स्थिति की निगरानी कर रहा है और अगर आर्थिक स्थिति आगे और भी स्थिर रहती है तो ब्याज दरों में राहत मिल सकती है।
रुपए की गिरावट को बताया सामान्य
उन्होंने भारतीय रुपए की हलचल पर भी बात की। गवर्नर ने कहा कि रुपए का हर साल 3% से 3.5% तक कमजोर होना सामान्य है। यह गिरावट अंतरराष्ट्रीय बाजार, ग्लोबल करेंसी मूवमेंट और विदेशी आर्थिक घटनाओं से प्रभावित रहती है। आरबीआई का मानना है कि जब तक घरेलू आर्थिक संकेतक मजबूत हैं, रुपए की सामान्य कमजोरी चिंता का कारण नहीं है।
दर कटौती की उम्मीद क्यों बढ़ी?
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म Morgan Stanley की हाल की रिपोर्ट ने इस उम्मीद को और मजबूत कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति (CPI) लगातार उम्मीद से कम आ रही है, जो आरबीआई को ब्याज दर घटाने का मौका दे सकती है।
अगर आरबीआई रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती करता है, तो रेपो रेट घटकर 5.25% हो जाएगा। इससे लोन की EMI में राहत मिल सकती है।
पिछले कुछ महीनों में क्या हुआ?
फरवरी से जून के बीच आरबीआई ने रेपो रेट में कुल 100 बेसिस पॉइंट की कटौती की थी। इसके बाद अगस्त और अक्टूबर की बैठकों में पॉलिसी रेट को स्थिर रखा गया। अब लगातार ठहरती महंगाई और मजबूत आर्थिक संकेतक एक बार फिर रेट कट की उम्मीद जगा रहे हैं।
दिसंबर की बैठक बनी बाजार की नजर
सभी की नजर अब आरबीआई की दिसंबर एमपीसी बैठक पर है। अगर इस बैठक में रेट कट होता है, तो होम लोन, कार लोन और बिजनेस लोन की ब्याज दरें कम हो सकती हैं। साथ ही बाजार में भी तेजी आने की उम्मीद है। बाजार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आर्थिक स्थिति यूं ही मजबूत बनी रही तो दिसंबर की बैठक 2024 की सबसे अहम मौद्रिक घोषणा साबित हो सकती है।
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