नई दिल्ली, जून 25। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को अनिवार्य कार्ड टोकनाइजेशन के लिए समय सीमा तीन महिने बढ़ा दिया है। आरबीआई ने पिछले साल डेडलाइन 30 जून, 2021 से छह महीने बढ़ाकर 30 दिसंबर, 2021 तक की थी और फिर दिसंबर में छह महीने के लिए बढ़ाकर 30 जून 2022 कर दिया था। अब केन्द्रीय बैंक ने व्यापारियों को कार्ड-ऑन-फाइल टोकन सिस्टम के तहत ग्राहकों के कार्ड स्टोरेज डाटा को डिलीट करने की समय सीमा को 30 सितंबर 2022 तक बढ़ा दिया है। आरबीआई के अनुसार कार्ड टोकनाइजेशन की प्रक्रिया में अच्छी प्रगती हुई है। कुछ बिजनेस फर्म ने टोकन का उपयोग करना शुरू कर दिया है लेकिन अभी सभी वर्गो के व्यापारियों ने टोकन सिस्टम को नही अपनाया है। अधिकतर बिजनेस फर्मों ने टोकन सिस्टम के लिए जरूरी व्यवस्था को स्थापित नहीं किया हैं।
आरबीआई ने एक अधिसूचना में कहा, 'सीओएफ (कार्ड-ऑन-फाइल) डेटा के स्टोरेज को रखने की समयसीमा को तीन महीने बढ़ाकर 30 सितंबर तक करने का निर्णय लिया गया है, तीन महिने बाद इस तरह के डेटा को सभी जगह से हटा दिया जाएगा।' साल 2020 में रिजर्व बैंक ने व्यापारियों को ग्राहकों की वित्तीय जानकारी की सुरक्षा के लिए उनके प्लेटफार्म पर स्टोर कार्ड डेटा को हटाने का निर्देश दिया था। टोकन सिस्टम के तहत व्यापारियों को कार्ड के विवरण जैसे कि 16 अंकों की संख्या, कार्ड की वैधता की तारीख और सीवीवी को स्टोर करने की अनुमति नहीं होगी बल्कि इसके बजाय एक टोकन जनरेट होगा जिसके माध्यम से लेनदेन हो पायेगा।
कई बिजनेस हाउस ने टोकन सिस्टम को लागू करने को लेकर व्यापारियों के पास जरूरी तैयारी न होने पर चिंता व्यक्त की थी। कुछ बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और कंपनियों ने टोकन जेनरेट करना शुरू कर दिया है लेकिन छोटे व्यापारी इस नई प्रणाली में माइग्रेट करने के लिए अभी तैयार नहीं है। कुछ व्यापारियों का कहना है कि टोकन सिस्टम में सरलता तो होगी लेकिन लोगों को जागरूक करने में हमें परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
आरबीआई के अधिसूचना के अनुसार अब तक 195 मिलियन टोकन जेनरेट किए जा चुके हैं। प्रारंभिक चरण में होने के बावजूद, आरबीआई ने कार्डधारकों से टोकन लेनदेन का विकल्प चुनने का आग्रह किया है। रिजर्व बैंक ने कहा है कि टोकन सिस्टम ग्राहको को अतिरिक्त सुरक्षा देने में सक्षम है। टोकन का उपयोग करने के इच्छुक कार्डधारकों के पास अपने कार्ड के विवरण को मैन्युअल रूप से दर्ज करने का विकल्प होता है।
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