भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के बोर्ड की अहम बैठक 22 मई को होने जा रही है। इस मीटिंग में मौजूदा वित्त वर्ष के लिए डिविडेंड ट्रांसफर की रकम पर फैसला लिया जाएगा। भारतीय फाइनेंशियल मार्केट के लिए यह एक बहुत बड़ी घटना है। फिलहाल ट्रेडर्स सरकारी बैंकों (PSU banks) के शेयरों में अपनी पोजीशन बना रहे हैं। अगर RBI की तरफ से बड़ा भुगतान होता है, तो इससे सरकार पर वित्तीय दबाव कम होगा और बॉन्ड यील्ड में भी गिरावट आ सकती है।

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बाजार को उम्मीद है कि इस बार सरप्लस 80,000 करोड़ से 1 लाख करोड़ रुपये के बीच रह सकता है। इस मोटी रकम से सरकार को अपने खर्चों में कटौती किए बिना राजकोषीय घाटे (fiscal deficit) को कम करने में मदद मिलेगी। निवेशक इस फैसले पर बारीकी से नजर रख रहे हैं क्योंकि इसी से अगले साल के लिए सरकार का उधारी प्लान तय होगा। कम उधारी का सीधा मतलब है कि बैंकिंग शेयरों और सरकारी कंपनियों (CPSEs) के प्रति निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। साल 2027 के वित्तीय आउटलुक के लिए यह लिक्विडिटी काफी महत्वपूर्ण है।

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RBI सरप्लस ट्रांसफर का फैसला और PSU बैंक

केंद्रीय बैंक से भारी डिविडेंड मिलने की उम्मीद में अक्सर सरकारी बैंकों के शेयरों में तेजी देखी जाती है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) जैसे शेयर कई निवेशकों की पहली पसंद बने हुए हैं। लंबी अवधि के लिए निवेश करने वालों को सरकारी कंपनियों (CPSEs) से भी अच्छा रिटर्न मिलता है। अगर RBI का ट्रांसफर अनुमान से ज्यादा रहता है, तो इन बैंकों में खरीदारी की दिलचस्पी और बढ़ सकती है। बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच ये स्टॉक एक सुरक्षा कवच (hedge) की तरह काम करते हैं।

सेक्टरसेंसिटिविटीमुख्य वजह
PSU बैंकज्यादासंभावित डिविडेंड
NBFCsमीडियमफंड की लागत
यूटिलिटीजज्यादाबॉन्ड यील्ड

बॉन्ड प्रॉक्सी और RBI सरप्लस ट्रांसफर का असर

यूटिलिटीज और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) जैसे बॉन्ड प्रॉक्सी पर इस खबर का सीधा असर पड़ता है। यील्ड कम होने से ये एसेट्स बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए और भी आकर्षक हो जाते हैं। अगर यील्ड गिरती है, तो नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) के लिए कर्ज लेना सस्ता हो जाएगा। अगर आधिकारिक आंकड़े उम्मीद से अलग आते हैं, तो ट्रेडर्स को इंट्राडे में बड़े उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए। ब्याज दरों में होने वाले बदलावों को लेकर ये सेक्टर काफी संवेदनशील रहते हैं।

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बाजार में भले ही उत्साह का माहौल हो, लेकिन अगर डिविडेंड 80,000 करोड़ रुपये से कम रहा, तो बिकवाली का दौर शुरू हो सकता है। ट्रेडर्स को सलाह है कि वे संवेदनशील सेक्टर्स में इंट्राडे पोजीशन लेते समय सख्त स्टॉप लॉस जरूर लगाएं। 22 मई को आने वाला अंतिम फैसला ही बाजार का शॉर्ट-टर्म ट्रेंड तय करेगा। इन लेवल्स पर नजर रखकर निवेशक मौजूदा उतार-चढ़ाव का सही फायदा उठा सकते हैं। आज के बाजार में मुनाफा कमाने के लिए सही समय पर एंट्री लेना बेहद जरूरी है।