नई दिल्ली। रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मौद्रिक नीति की घोषणा कर दी है। आज यानी 5 फरवरी 2021 को आरबीआई ने घोषणा की है वह अपनी प्रमुख दरों में कोई बदलाव नहीं कर रहा है। आरबीआई ने कहा है कि रेपो रेट की दर 4 फीसदी और रिवर्स रेपो रेट की दर 3.35 फीसदी पर बनी रहेगी। इस बात की घोषणा रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने की है। आरबीआई की तरफ से मॉनेटरी पॉलिसी की घोषणा के बाद एक बार फिर से शेयर बाजार में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली।

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ये भी हुए ऐलान

आरबीआई ने इसके अलावा एमएसएफ और बैंक रेट में भी कोई बदलाव नहीं किया है। यह पहले की तरह ही 4.25 फीसदी पर बना रहेगा। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 10.5 फीसदी रहने का जताया है। वहीं आर्थिक सर्वे में जीडीपी का अनुमान 11 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया था।

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महंगाई में कमी का अनुमान

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति की घोषणा के दौरान कहा कि मुद्रास्फीति में कमी आएगी। उनके अनुसार यह अब 6 फीसदी के टॉलरेंस लेवल से नीचे है। उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि अभी ग्रोथ को सपोर्ट किया जाए। उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कैपिसिटी यूटिलाइजेशन में सुधरा देखा जा रहा है। यह इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 63.3 फीसदी रहा है, जो पहली तिमाही में 47.3 फीसदी था। आरबीआई गवर्नन ने कहा कि अर्थव्यवस्था में रिकवरी और तेज हुई है। दिसंबर के महीने में रिटेल महंगाई गिरकर 4.59 फीसदी पर आ गई है, जो आरबीआई के 2 फीसदी से लेकर 6 फीसदी की लिमिट के दायरे में है।

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लगातार तीसरी बार रेपो रेट नहीं बदली

आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने लगातार पिछली 3 बैठकों में नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। मौजूदा समय में रेपो रेट 4 फीसदी हैं, जो 15 साल का न्यूनतम स्तर पर हैं। वहीं, इस समय रिवर्स रेपो रेट 3.35 फीसदी है।

ये है रेपो रेट का सफर

-4 दिसंबर 20 को 4.00 फीसदी
-9 अक्टूबर 20 को 4.00 फीसदी
-6 अगस्त 20 को 4.00 फीसदी
-22 मई 2020 को 4.00 फीसदी
-27 मार्च 2020 को 4.40 फीसदी

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मौद्रिक नीति की प्रमुख घोषणाएं

-एमपीसी ने 3 मौजूदा लोकपाल योजनाओं को आपस में जोड़ने और एक सेंट्रलाइज्ड योजना बनाने का फैसला किया है। इसे जून 2021 में शुरू किया जाएगा

-डिजिटल पेमेंट सिस्टम के आउटसोर्सिंग के लिए आरबीआई गाइडलाइंस जारी करेगा

-रिटेल डायरेक्ट प्लेटफॉर्म लॉन्च होगा, जिससे रिटेल इनवेस्टर्स को सरकारी प्रतिभूति में लेनदेन का सीधा मौका मिलेगा

-प्राइमरी अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों को मजबूत करने के लिए एक्सपर्ट पैनल का गठन होगा

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आरबीआई की घोषणा के बाद शेयर बाजार में रिकॉर्ड तेजी

आरबीआई की तरफ से मॉनेटरी पॉलिसी की घोषणा के बाद एक बार फिर से शेयर बाजार में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों इंडेक्स ने ऊंचाई का नया रिकॉर्ड बनाया। सेंसेक्स जहां पहली बार 51000 के पार निकल गया, वहीं निफ्टी ने भी 15000 का बैरियर तोड़ दिया।

मॉनिटरी पॉलिसी में इस्तेमाल होने वाले शब्दों का मतलब

रेपो रेट : रेपो रेट वह दर होती है जिस पर बैंकों को आरबीआई कर्ज देता है. बैंक इस कर्ज से ग्राहकों को लोन देते हैं। रेपो रेट कम होने से मतलब है कि बैंक से मिलने वाले कई तरह के कर्ज सस्ते हो जाएंगे, जैसे कि होम लोन, व्हीकल लोन वगैरह।

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रिवर्स रेपो रेट : जैसा इसके नाम से ही साफ है, यह रेपो रेट से उलट होता है। यह वह दर होती है जिस पर बैंकों को उनकी ओर से आरबीआई में जमा धन पर ब्याज मिलता है। रिवर्स रेपो रेट बाजारों में नकदी की तरलता को नियंत्रित करने में काम आती है. बाजार में जब भी बहुत ज्यादा नकदी दिखाई देती है, आरबीआई रिवर्स रेपो रेट बढ़ा देता है, ताकि बैंक ज्यादा ब्याज कमाने के लिए अपनी रकम उसके पास जमा करा दे।

सीआरआर : देश में लागू बैंकिंग नियमों के तहत हरेक बैंक को अपनी कुल नकदी का एक निश्चित हिस्सा रिजर्व बैंक के पास रखना होता है। इसे ही कैश रिजर्व रेश्यो या नकद आरक्षित अनुपात कहते हैं।

एसएलआर : जिस दर पर बैंक अपना पैसा सरकार के पास रखते है, उसे एसएलआर कहते हैं। नकदी की तरलता को नियंत्रित करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। कमर्शियल बैंकों को एक खास रकम जमा करानी होती है जिसका इस्तेमाल किसी इमरजेंसी लेन-देन को पूरा करने में किया जाता है। आरबीआई जब ब्याज दरों में बदलाव किए बगैर नकदी की तरलता कम करना चाहता है तो वह सीआरआर बढ़ा देता है, इससे बैंकों के पास लोन देने के लिए कम रकम बचती है।