नयी दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नरों में से एक एनएस विश्वनाथन ने इस्तीफा दे दिया है। विश्वनाथन ने स्वास्थ्य से कारणों का हवाला देते हुए समय से पहले रिटायरमेंट मांगा है। बता दें कि वह इसी साल 3 जुलाई को रिटायर होने वाले थे। आरबीआई में चार उप-गवर्नर होते हैं, जिनमें दो रैंक के भीतर और एक कमर्शियल बैंकर होता है, जबकि कोई एक अर्थशास्त्री मौद्रिक नीति विभाग का प्रमुख होता है। 58 वर्षीय विश्वनाथन 1981 में आरबीआई में शामिल हुए। उन्हें जिन क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल है उनमें बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों और सहकारी बैंकों, मुद्रा प्रबंधन, विदेशी मुद्रा और मानव संसाधन प्रबंधन के विनियमन और पर्यवेक्षण शामिल हैं।
2016 में बने थे आरबीआई के डिप्टी गवर्नर
उन्हें 2016 में तीन वर्षों के कार्यकाल के लिए पहली बार आरबीआई का डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया गया था, जिसके बाद उन्हें एक और वर्ष के लिए फिर से इसी पद के लिए नियुक्त किया गया था। केंद्रीय बैंक में उनकी 29 साल की सेवा 31 मार्च को समाप्त हो रही है। डेक्कन हेराल्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार वे तनाव संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी है, जिसके चलते विश्वनाथन ने जल्दी रिटायरमेंट का फैसला लिया।
पिछले 15 महीनों में तीसरा बड़ा इस्तीफा
विश्वनाथन पिछले 15 महीनों में केंद्रीय बैंक से निकलने वाले तीसरे हाई प्रोफाइल शख्स हैं। करीब 9 महीने पहले डिप्टी गवर्नर वायरल आचार्य ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया था। विश्वनाथन जिन्होंने बैंगलोर विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ इकोनॉमिक्स किया है, पूर्व आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल के प्रमुख समर्थक थे, जिन्होंने 2018 में पद छोड़ने के फैसले सभी को आश्चर्यचकित कर दिया था। पटेल के इस्तीफा देने के बाद विश्वनाथन उनकी जगह लेने वाले संभावित दावेदारों में से एक थे।
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