अगर आप मोबाइल बैंकिंग ऐप का इस्तेमाल करते हैं तो यह खबर आपके लिए अहम है। देश के केंद्रीय बैंक Reserve Bank of India (RBI) ने सभी बैंकों को साफ निर्देश दिए हैं कि वे अपनी वेबसाइट और मोबाइल ऐप से ऐसे सभी भ्रामक तरीके हटाएं, जिनसे ग्राहक अनजाने में किसी सर्विस के लिए हामी भर देते हैं या छिपे हुए चार्ज का शिकार हो जाते हैं।

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आज ज्यादातर लोग पैसे भेजने, बिल भरने, लोन लेने या निवेश करने के लिए बैंक ऐप का सहारा लेते हैं। लेकिन कई बार ऐप में ऐसे डिजाइन होते हैं जो ग्राहक को भ्रमित कर देते हैं। अब RBI ने इसी पर सख्ती दिखाई है।

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क्या है पूरा मामला?

कई बैंक ऐप में कई सर्विसें इस तरह दिखाते हैं कि ग्राहक को लगे कि वह जरूरी है। कुछ मामलों में "नो" का विकल्प छोटा और "हां" का बटन बड़ा दिखता है। कई बार अंतिम चरण में अतिरिक्त शुल्क जुड़ जाता है, जिसकी जानकारी पहले साफ तौर पर नहीं दी जाती।

इन तरीकों को आम तौर पर "डार्क पैटर्न" कहा जाता है। RBI का कहना है कि बैंकिंग सेवाओं में इस तरह की चालें ग्राहकों के हित के खिलाफ हैं।

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नए नियमों में क्या बदलेगा?

RBI के नए निर्देशों के मुताबिक किसी भी सर्विस या प्रोडक्ट के लिए ग्राहक की साफ सहमति लेना जरूरी होगा। बिना जानकारी दिए कोई ऐड-ऑन सुविधा नहीं जोड़ी जाएगी। सभी शुल्क, नियम और शर्तें साफ और आसान भाषा में पहले ही दिखानी होंगी। किसी सेवा को दूसरी सर्विस के साथ जबरन जोड़कर नहीं बेचा जाएगा। बैंकों को इन बदलावों को लागू करने के लिए जुलाई 2026 तक का समय दिया गया है। इसके बाद नियमों की निगरानी की जाएगी।

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ग्राहकों के लिए क्या मायने?

इन नियमों के लागू होने के बाद बैंक ऐप ज्यादा साफ और समझने में आसान होंगे। ग्राहक को पहले से पता होगा कि वह किस सेवा के लिए सहमति दे रहा है और उसे कितना भुगतान करना होगा। इससे छिपे हुए चार्ज और अनचाहे खर्च से बचाव होगा।

डिजिटल बैंकिंग तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में भरोसा बनाए रखना बहुत जरूरी है। RBI का यह कदम इसी दिशा में बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

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आने वाले समय में बैंकिंग ऐप का अनुभव ज्यादा पारदर्शी और ग्राहक हित में होगा। इससे आम लोगों को राहत मिलेगी और डिजिटल लेन-देन और सुरक्षित बनेंगे।