Sovereign Gold Bond Redemption: गोल्ड बॉन्ड में इन्वेस्ट करना हमेशा से ही एक सुरक्षित और बेहतर रिटर्न देने वाला विकल्प माना जाता रहा है। आपको बताते चलें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने साल 2015 में पहले सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड रिलीज किया था। लगभग 8 साल बाद जब इस गोल्ड बॉन्ड की रिडेंप्शन प्राइस को सरकार द्वारा रिलीज किया गया है तो निवेशकों को जबर्दस्त फायदा मिला है। आपको बताते चलें की जब पहला गोल्ड बॉन्ड रिलीज हुआ था तो प्रति यूनिट यानी प्रति ग्राम उसकी कीमत 2684 थी, लेकिन अब उसी गोल्ड बॉन्ड की रिडेंप्शन प्राइस बढ़कर 6132 रुपए प्रति यूनिट तय की गई है।
आपको बताते चलें की 30 नवंबर 2023 को पहली सीरीज मैच्योर हो रही है, जिसे 30 नवंबर 2015 में इशू किया गया था। मैच्योरिटी के बाद गोल्ड बॉन्ड का रिडेंप्शन होना है। इस दौरान जो रिडेंप्शन प्राइस है, इस कीमत पर लोग अपने गोल्ड बॉन्ड को बेच सकते हैं।
गौरतलब है कि 20 से 24 नवंबर वाले हफ्ते की क्लोजिंग गोल्ड प्राइस के सिंपल एवरेज की आधार पर फाइनल रिडेंप्शन प्राइस तय किया गया है। 5 नवंबर 2015 को पहली बार गोल्ड बॉन्ड लॉन्च किया गया था और 20 नवंबर तक इसका सब्सक्रिप्शन हुआ था और 30 नवंबर 2015 को यह गोल्ड बॉन्ड इश्यू किया गया था।
इस गोल्ड बॉन्ड इन्वेस्टर्स को जबर्दस्त फायदा हुआ है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2015 वाली स्कीम के तहत अगर किसी निवेशक ने पहली सीरीज में 35 ग्राम सोना लिया है, तो 2684 रुपए प्रति ग्राम के हिसाब से उसका कुल निवेश 93,940 रुपए के आसपास का रहा होगा। वहीं रिडेंप्शन प्राइस यानी 6132 रुपए की कीमत में इतना सोना बेचने पर आपको कुल 2,14,620 रुपए मिलेंगे। इस सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर आपको 128.5 प्रतिशत का रिटर्न यह रिटर्न बिना इंटरेस्ट के जोड़ा गया है।
आपको बताते चलें कि आरबीआई की आंकड़े के अनुसार 9,13,571 यूनिट गोल्ड बॉन्ड की बिक्री हुई थी,जिसकी वैल्यू 0.91 टन सोने की वैल्यू के बराबर है।
देखा जाए तो इन्वेस्टर्स को इस सीरीज के लिए हर साल 2.75 फ़ीसदी का रिटर्न मिला है, जिसका एवरेज पूरे महीने में 590.48 रुपए के करीब है। इस तरह अगर देखा जाए तो इंटरेस्ट जोड़ने के बाद पहली सीरीज ने करीब 12 फीसदी से भी ज्यादा का एनुअल रिटर्न दिया है। वही बिना ब्याज जोड़ यह एनुअल रिटर्न 10.8 परसेंट के आसपास है। गौरतलब है कि 2016 के बाद से जारी होने वाले सभी गोल्ड बॉन्ड सीरीज के लिए एनुअल इंटरेस्ट को घटकर 2.5 फीसदी तक ही कर दिया गया है।
आपको बताते चले कि आमतौर पर लोगों को लगता है कि सेकेंडरी मार्केट यानी एनएसई और बीएसई के जरिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को खरीदा जाए, तो मैच्योरिटी के बाद रिडीम करते वक्त कैपिटल गैन पर टैक्स लगता है, लेकिन ऐसा नहीं है अगर आपने सेकेंडरी मार्केट से भी सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड खरीद है, तो मैच्योरिटी के बाद उसे रिडीम करने पर कैपिटल गैन पर कोई टैक्स नहीं देना होता है।
गोल्ड बॉन्ड में इन्वेस्ट करना है तो जानें यह बात
भारतीय रिजर्व बैंक हर फाइनेंशियल ईयर में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड सीरीज इशू करने की घोषणा करता है। इस समय चल रहे नियम के अनुसार कोई भी इन्वेस्टर एक फाइनेंशियल ईयर में 4 किलोग्राम तक सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में इन्वेस्ट कर सकता है। अगर आप चाहे तो इसमें मात्र एक ग्राम का मिनिमम इन्वेस्टमेंट भी कर सकते हैं।
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