Rajesh Mehta Success Story: आज के वक्त में देश में स्टार्टअप कल्चर का काफी बड़ा क्रेज है। हमें आए दिन कई सारे युवा उद्यमियों के बारे में सुनने को मिलता है। कहा जा सकता है कि आज स्टार्टअप्स के लिए माहौल काफी सूटेबल है, परंतु ऐसा हमेशा से नहीं था। जीरो से शुरू करके कामयाबी के शिखर तक पहुंचने वालों की यात्रा बिलकुल भी आसान नहीं रही।

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एक ऐसा ही सफर राजेश मेहता ने भी किया। किसी समय दुकान दुकान जाकर सोने के गहने बेचने वाले राजेश मेहता की आज हजारों करोड़ रु की कंपनी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कंपनी इस समय देश की बड़ी गोल्ड एक्सपोर्ट करने वाली फर्म है।

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केवल 10 हजार रु से गोल्ड बिजनेस की शुरुआत करने वाले राजेश ने 13 हजार 800 करोड़ रु का व्यापारिक साम्राज्य खड़ा कर दिया है तो फिर आइए जानते हैं इनके बारे में।

राजेश मेहता, राजेश एक्सपोर्ट के मालिक और कार्यकारी अध्यक्ष हैं। राजेश एक्सपोर्ट गोल्ड के प्रोडक्ट को बनाकर एक्सपोर्ट करती है। कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में सालाना 400 टन सोने के उत्पादों के निर्माण करने की क्षमता है।

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बचपन में राजेश का सपना डॉक्टर बनने का था लेकिन उनकी किस्मत में कुछ और ही लिखा था। मूल रूप से गुजरात के रहने वाले राजेश की पढ़ाई बेंगलुरु से हुई। राजेश के पिता ज्वैलरी कारोबार के लिए कर्नाटक आए थे।

राजेश पढ़ाई के दौरान ही केवल 16 वर्ष की आयु में वे अपने पिता के साथ कार्य करने लगे। राजेश ने अपने फैमिली कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए अपने बड़े भाई के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया।

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राजेश ने कारोबार में कुछ बेहतर करने की इच्छा से भाई से 2 हजार रु उधार और बैंक से 8 हजार रु का कर्ज लिया। इसके बाद उन्होंने उधार के पैसों से वर्ष 1982 में बिजनेस शुरू किया।

राजेश मेहता चेन्नई से आभूषण को खरीदकर गुजरात के राजकोट में बेच देते थे। शुरू में उन्होंने छोटे स्तर पर इस कारोबार को किया। कामयाबी मिलने के बाद राजेश ने गुजरात में थोक व्यापारियों को ज्वैलरी बेचना शुरू कर दिया।

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इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने अपने कारोबार का विस्तार चेन्नई, बैंगलोर और हैदराबाद तक अपने बिजनेस का विस्तार किया। जब उन्होंने वर्ष 1989 में सोने के आभूषणों के बिजनेस में कदम रखा। तब उनके करियर में अहम मोड़ आया।

उन्होंने बेंगलुरु में अपने छोटे-से गैरेज में एक गोल्ड ज्वैलरी मैन्युफेक्चरिंग यूनिट शुरू की। यह वे माल बनाते थे। इसके बाद वे इस माल को ओमान, कुवैत, ब्रिटेन, दुबई, अमेरिका और यूरोप तक निर्यात करते। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड का मार्केट कैंप लगभग 13 हजार 800 करोड़ रु है।

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