राजस्थान सरकार ने किसानों के लिए एक बड़ी राहत की घोषणा की है। मुख्यमंत्री शून्य प्रतिशत ब्याज मुक्त फसल ब्याज योजना के तहत किसानों को केंद्रीय सहकारी बैंक से ऋण मिलेगा। ये लोन अल्पकालीन फसल की खेती और पशुपालन के लिए हैं।

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किसानों के लिए ब्याज मुक्त लोन

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इस पहल का उद्देश्य ब्याज मुक्त लोन देकर किसानों पर वित्तीय दबाव को कम करना है। अगर किसान समय पर अपना लोन चुकाते हैं, तो उन्हें कोई ब्याज शुल्क नहीं देना पड़ेगा। यह योजना वित्तीय बोझ बढ़ाए बिना कृषि गतिविधियों का समर्थन करने के लिए बनाई गई है।

हालांकि, अगर कर्ज चुकाने में देरी होती है, तो किसानों को 10 प्रतिशत ब्याज दर का सामना करना पड़ेगा। रबी फसलों के लिए, 1 सितंबर 2023 से 31 मार्च 2024 के बीच लिए गए ऋणों को 31 अगस्त 2024 तक चुकाना होगा। लोन की तारीख से 12 महीने के अंदर दोबारा भुगतान किया जाना चाहिए, जो भी पहले हो।

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दोबारा भुगतान नियम एवं शर्तें

इन ऋणों का समय पर भुगतान करना बहुत ज़रूरी है। समय पर भुगतान न करने पर वित्तीय दंड लग सकता है और अगली फसलों के लिए नामांकन रद्द हो सकता है। इससे किसानों को काफ़ी वित्तीय नुकसान हो सकता है। अगर कोई किसान समय पर सही से अपना ऋण चुका देता है, तो वह नए ऋण के लिए पात्र हो जाता है। उदाहरण के लिए, रबी 2023-24 के लिए लिया गया ऋण चुकाने से उसे खरीफ 2024 के लिए नया ऋण मिल जाता है।

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नये लोन के लिए पात्रता

जो किसान दोबारा भुगतान की समय-सीमा को पूरा करते हैं, वे भविष्य के कृषि चक्रों के लिए नए लोन लेकर इस योजना का लाभ उठाना जारी रख सकते हैं। इससे उनकी खेती की गतिविधियों के लिए बिना किसी रुकावट के निरंतर समर्थन तय होता है। अगर कोई किसान तय समय में लोन नहीं चुका पाता है तो कृषि से जुड़े बैंकों को बकाया रकम वसूलने का अधिकार है। यह वसूली प्रक्रिया तय करती है कि योजना टिकाऊ बनी रहे और इसका लाभ उन लोगों को मिले जो इसकी शर्तों का पालन करते हैं।

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किसानों को इस तरह मिलेगा बढ़ावा

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 8 जून को भी कई बड़े ऐलान किए थे जिससे किसानों को सीधे लाभ मिल सके, भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री किसान सम्मन निधि स्कीम के तहत 2000 रुपए सालाना अपनी तरफ से देगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कुल 57 लाख किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि स्कीम के तहत फायदा मिल रहा है, सरकार ने इस बड़े फैसले को लेते हुआ कहा की सालाना सरकार के खजाने में 1100 करोड़ रुपए का अलग से खर्च आएगा।