नयी दिल्ली। पिछले तीन महीनों से सोना खूब चमक रहा है। सोने की कीमतों में तेजी के कारण हाल के दिनों में गोल्ड फंड्स और गोल्ड ईटीएफ में भारी निवेश आया है। हालांकि ध्यान देने वाली बात यह है कि निवेशक गोल्ड फंड की तुलना में गोल्ड ईटीएफ पर ज्यादा दांव लगा रहे हैं। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ये बदलाव वास्तव में हो रहा है और इसकी वजह हैं। उदाहरण के लिए गोल्ड ईटीएफ में जुलाई में 921 करोड़ रुपये का निवेश किया गया, जो पिछले महीने से 86 फीसदी की बढ़त थी। दूसरी ओर गोल्ड फंड्स में 471 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया। अगर इस साल जनवरी के आंकड़ों पर नजर डालें तो गोल्ड ईटीएफ में 202 करोड़ रुपये के मुकाबले गोल्ड फंड्स में 56 करोड़ रुपये का निवेश आया। वहीं फरवरी में गोल्ड फंड्स में आने वाला निवेश घटा। उस महीने में गोल्ड ईटीएफ में 1,483 करोड़ रुपये की तुलना में निवेशकों ने गोल्ड फंड्स में सिर्फ 29 करोड़ रुपये का निवेश किया।
- मार्च : गोल्ड ईटीएफ में से 195 करोड़ रु निकाले गए, जबकि गोल्ड फंड्स में 39 करोड़ रु का निवेश आया
- अप्रैल : गोल्ड फंड्स में 333 करोड़ रु के मुकाबले गोल्ड ईटीएफ में 731 करोड़ रु आए
- मई : गोल्ड फंड्स में 344 करोड़ रु के मुकाबले गोल्ड ईटीएफ में 815 करोड़ रु आए
- जून : गोल्ड फंड्स में 230 करोड़ रु के मुकाबले गोल्ड ईटीएफ में 494 करोड़ रु आए
- जुलाई : गोल्ड फंड्स में 471 करोड़ रु के मुकाबले गोल्ड ईटीएफ में 921 करोड़ रु आए
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार म्यूचुअल फंड प्रतिभागी बताते हैं कि गोल्ड फंड्स कैटेगरी में गोल्ड फंड्स ऑफ फंड या एफओएफ शामिल होते हैं, जो गोल्ड ईटीएफ में निवेश करते हैं। इसलिए एयूएम (एसेट अंडर मैनेजमेंट या किया जाने वाला निवेश) ईटीएफ में जुड़ जाता है। गोल्ड ईटीएफ में बढ़ रहे निवेश के पीछे ये सबसे बड़ा कारण है।
ब्रोकरेज के मुताबिक निवेशक लॉकडाउन के दौरान बड़ी संख्या में ट्रेडिंग खाते खोल रहे हैं। कुछ एफओएफ में एक्सपेंस रेशियो और एग्जिट लोड (पूंजी निकालने पर लगने वाला चार्ज) बेहद कम है। उदाहरण के लिए निप्पॉन इंडिया ईटीएफ गोल्ड 0% एग्जिट लोड है और निप्पॉन इंडिया गोल्ड सेविंग्स फंड में कोई एग्जिट लोड नहीं है यदि आप 15 दिनों बाद ही रिडीम करते हैं। यह उन लोगों के बेहतर ऑप्शन है जो सोने में तेजी के समय खरीदारी और बिकवाली करना चाहते हैं।
गोल्ड ईटीएफ में रिटर्न भी अच्छा रहा है। इसके अलावा जानकार बताते हैं कि लॉकडाउन के कारण और फिजिकल डिलिवरी में दिक्कत के कारण कई कमोडिटी निवेशक भी गोल्ड ईटीएफ में ट्रांसफर हो गए हैं। ईटीएफ में ट्रेडिंग आसान है। एफओएफ इन दिनों अच्छी योजनाएं भी पेश कर रहे हैं। तो क्विक मनी के लिए एफओएफ के साथ-साथ ईटीएफ में भी दिलचस्पी बढ़ गई है।
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