नयी दिल्ली। आज के समय में एजुकेशन इतनी महंगी हो गई है कि एक लेवल पर पहुंचने के बाद हर छात्र अपनी मनचाही शिक्षा हासिल नहीं कर पाता। नतीजतन छात्रों को कम शिक्षा पर ही संतुष्ट रहना पड़ता है। मगर ऐसे छात्रों को सरकार की एक योजना से काफी मदद मिल सकती है। ये है प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप योजना, जिसके तहत होनहार छात्रों को हर महीने 80 हजार रु तक की मदद दी जाती है। प्रधानमंत्री फेलोशिप रिसर्च योजना, जिसकी शुरुआत 2018 नें की गई थी, के तहत देश के हजारों छात्रों को मुफ्त में पीएचडी करने का मौका मुहैया कराया जाता है। आइए जानते हैं इस योजना की पूरी डिटेल।
ये फेलोशिप योजना पहले इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग साइंस एंड टेक्नोलॉजी के छात्रों के लिए ही थी। मगर इसमें बदलाव किया गया और अब किसी भी इंस्टीट्यूट और यूनिवर्सिटी के छात्र इस योजना का लाभ ले सकते हैं। वहीं गेट का एग्जाम पास करने वाले छात्र भी इस योजना के लिए आवेद कर सकते हैं।
फेलोशिप के लिए पात्र होने के लिए उम्मीदवारों को एक लिखित परीक्षा और साक्षात्कार से गुजरना होता है। इसमें एक डिस्कशन भी शामिल हो सकता है। आवेदन के साथ उम्मीदवारों को रिसर्च एब्सट्रैक्ट भी देना होता है, जिसमें रिसर्च प्रॉब्लम और अप्रोच शामिल होती हैं। इस योजना के तहत छात्रों को हर महीने 80 हजार रु तक की मदद दी जाती है।
चुने गए आवेदकों को पहले दो वर्षों के लिए 70,000 रुपये प्रति माह, तीसरे वर्ष के लिए 75,000 रुपये प्रति माह और चौथे और पांचवें वर्ष में 80,000 रुपये प्रति माह की फ़ेलोशिप मिलेगी। इसके अलावा प्रत्येक वर्ष दो लाख रुपये का रिसर्च ग्रांट भी दिया जाता है। ये ग्रांट उनके अकेडमिक कंटिंजेंसी खर्चों और विदेशी / राष्ट्रीय यात्रा खर्चों को को कवर करने के लिए दिया जाता है।
इस फेलोशिप योजना से छात्र भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआरएस), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और एनआईआरएफ शीर्ष 100 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में पीएचडी प्रोग्राम में शिक्षा हासिल करने में मदद मिलती है। सरकार ने 2018 में 7 सालों के लिए इस योजना के तहत 1650 करोड़ रु का आवंटन किया था।
भारत में बड़ी संख्या मध्य वर्ग के लोगों की है। ऐसे में हर परिवार अपने बच्चों को हाई एजुकेशन नहीं दिला सकता है। इसका नतीजा ये होता है छात्र एक स्तर पर पहुंचने के बाद अपनी शिक्षा को बीच में ही छोड़ देते हैं। मगर ये फेलोशिप योजना ऐसे अच्छे छात्रों की मदद करती है। इस योजना से सालाना हजारों छात्रों को फायदा मिलता मिलता है।
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