नयी दिल्ली। बाजार में कम आपूर्ति की वजह से एक बार प्याज के थोक दाम 100 रुपये के करीब पहुँच गये। सोमवार को दिल्ली में प्याज की थोक कीमतें 95 रुपये प्रति किलों पर पहुँच गयी। इसके चलते दिल्ली-एनसीआर में प्याज की खुदरा कीमतें 125 रुपये प्रति किलो तक दर्ज की गयी। बाजार में प्याज के पहुँचने में अड़चन आ रही है, जिसकी वजह से प्याज के दाम फिर से रफ्तार पकड़ने लगे हैं। आगे कुछ दिनों में इनमें और बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे प्याज की थोक कीमतें 200 रुपये तक जा सकती हैं। कारोबारियों का कहना है कि अफगानिस्तान से आयात रुकने के कारण प्याज की कीमतों में दोबारा उछाल आ रहा है। घरेलू स्तर पर भी प्याज की आपूर्ति में कमी से कीमतों में इजाफा हुआ है। व्यापारियों ने कहा कि पिछले तीन दिनों में बारिश के कारण घरेलू बाजार में आने वाली प्याज की आवक प्रभावित हुई है।
ऐसा कहा जा रहा है कि से पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से आने वाली प्याज के अपनी जमीन से गुजरने पर रोक लगा दी है, जिससे आपूर्ति प्रभावित हुई और कीमतें फिर बढ़ी हैं। मगर एक कस्टम अधिकारी के मुताबिक अफगानिस्तानी प्याज सोमवार को भी पाकिस्तान के रास्ते आयी है। पिछले हफ्ते प्याज के दाम दिल्ली और पूरे उत्तर भारत में अफगानिस्तान के प्याज की आपूर्ति के कारण कम हुए थे। वहीं दिसंबर में के पहले हफ्ते में देश के कुछ हिस्सों में प्याज के दाम 200 रुपये के ऊपर चले गये थे।
नयी खरीफ फसल के मंडियों में पहुँचने से सब्जियों और अनाज के दामों में नरमी आ रही है। मगर फिर भी मौजूदा समय में सब्जियों के दाम पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 50 फीसदी ज्यादा हैं। पिछले सर्दियों के मौसम के मुकाबले आलू, टमाटर, फूलगोभी, पालक और दूसरी हरी सब्जियों की कीमतें लगभग 50 फीसदी अधिक हैं। सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी की असल वजह है कम आपूर्ति। देश भर में मानसून की देरी और कुछ जगहों पर बारिश की वजह से शुरुआती फसलें नष्ट हो गयी, जिससे आपूर्ति प्रभावित हुई।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अक्टूबर में राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कुछ अन्य जगहों पर हुई बारिश ने प्याज, टमाटर और अन्य सब्जियों के साथ-साथ तिलहन और दलहन फसलों को प्रभावित किया। नतीजा यह हुआ कि आपूर्ति कम हो गयी और कीमतों में बढ़ोतरी हुई। संसद में उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान ने आंकड़े पेश किये थे, जिनके मुताबिक मार्च के बाद प्याज की कीमतों में 400 फीसदी से ज्यादा की बढ़त हुई। सब्जियों के दाम बढ़ने से थोक और खुदरा महंगाई दर भी बढ़ी है।
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