नई दिल्ली। देश में कोनोरा वायरस यानी कोविड-19 से लड़ने को लेकर लगाातर तैयारी जारी है। देश में प्रति व्यक्ति अस्पताल के कमरों की कमी है। लेकिन इससे बचने का रास्ता खोजा जा रहा है। एक प्रस्ताव आया है, जिसमें ट्रेन के डिब्बों को आइसोलेशन वार्ड में बदलने की बात है। इससे जहां कमरों की कमी को तुरंत दूर किया जा सकेगा, वहीं देश के दूर दराज के क्षेत्र में भी इलाज की सुविधा को तुरंत पहुंचाया जा सकेगा। देश में रेलवे के पास हजारों डिब्बें हैं। आज कल ट्रेनों का संचालन ठप रखा गया है, जिस कारण इनका जरूरत पड़ने पर तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है।

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रेलवे कर रहा इस प्रस्ताव पर विचार

लाइव मिंट ने सूत्रों के हवाले से इस संबंध में खबर प्रकाशित की है। लाइव मिंट के मुताबिक, बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए खाली पड़े कोच और केबिन को आइसोलेशन वार्ड के तौर पर इस्तेमाल करने के प्रस्ताव पर चर्चा की गई। इस चर्चा में रेल मंत्री पीयूष गोयल, चेयरमैन वीके यादव सहित सभी जोन के जनरल मैनेजर और डिविजलन मैनेजर मौजूद थे।

कैबिनेट मीटिंग के बाद हुई है यह मीटिंग

कोरोना वायरस संकट से निपटने के लिए पीएम नरेन्द्र मोदी ने गत बुधवार को कैबिनेट मीटिंग की थी। इसके बाद रेलवे ने इस तरह के प्रस्ताव पर विचार विमर्श शुरू किया है। रेलवे चेयरमैन वीके यादव ने कहा है कि रेलवे कोच और केबिन को अस्थाई तौर पर अस्पताल के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें परामर्श कक्ष, मेडिकल स्टोर साहित आईसीयू और पेंट्री में बदला जा सकता है।

दूरदराज के क्षेत्र में तुरंत भेजे जा सकते है रेलवे के कोच

रेलवे अपने कोच को देश के किसी भी स्थान पर कभी भी भेज सकता है। इस कारण इनको उन स्थानों पर तुरंत भेजा जा सकता है, जहां पर जहां पर कोरोना वायरस के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो। रेलवे रोजाना 13,523 ट्रेनों का संचालन करता है और पूरे देश में लॉकडाउन के चलते 14 अप्रैल तक सभी यात्री सेवाओं को रद्द कर दिया गया है। इस कारण हजारों कोच खाली खड़े हैं। 

भारत में बेड की है खराब स्थिति

डब्लूएचओ के एक अनुमान के मुताबिक, भारत में प्रति 1000 लोगों पर 0.7 बेड ही उपलब्ध हैं। जबकि इसे 2 बेड तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। डब्लूएचओ देश में प्रति 1000 लोगों पर कम से कम 3 बेड बनाने की बात कहता है।