Petrol Price Hike: प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में लगभग 2-2.3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है, जबकि पूरे देश में रेगुलर पेट्रोल और डीजल की के रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यह बढ़ोतरी इंडियन ऑयल के XP95 और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के पावर पेट्रोल जैसे हाई-ऑक्टेन ईंधनों पर लागू होती है, जो चुनिंदा शहरों के डीलरों से मिली जानकारी पर आधारित है।

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बताया जा रहा है कि नई कीमतें 20 मार्च से लागू हो गई हैं। कुछ आउटलेट्स पर, IOCL के XP95 की कीमत अब लगभग 101.80 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि HPCL के प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में भी अलग-अलग पंपों पर इसी तरह की बढ़ोतरी देखी गई है।

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प्रीमियम पेट्रोल की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सप्लाई में रुकावट के डर के बीच, ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के निशान से ऊपर मजबूती से ट्रेड कर रहा है। कच्चे तेल की ज्यादा कीमतों से इंडियन ऑयल, HPCL और BPCL जैसी तेल मार्केटिंग कंपनियों की इनपुट लागत बढ़ जाती है।

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साथ ही, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर गिर गया है, जिससे भारत के लिए कच्चे तेल का आयात और भी महंगा हो गया है; भारत आयातित तेल पर बहुत ज्यादा निर्भर है। नतीजतन, तेल कंपनियों ने आम पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने के बजाय, जिनका इस्तेमाल ज्यादा बड़े पैमाने पर होता है। प्रीमियम पेट्रोल के वेरिएंट्स में चुनिंदा तौर पर कीमतें बढ़ाने का फैसला किया है।

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सरकार ने कहा है कि यह बढ़ोतरी सिर्फ प्रीमियम ईंधनों तक ही सीमित है, और यह कीमतों में कोई व्यापक बदलाव नहीं है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि "सिर्फ प्रीमियम कैटेगरी के पेट्रोल की कीमतें बढ़ी हैं। पेट्रोल और डीजल की कीमतें अब सरकार के नियंत्रण से बाहर हैं, और कीमतों में कोई भी बढ़ोतरी कंपनियों का फैसला होता है,"।

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आम आदमी पर क्या होगा असर?

आम पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में इनकी कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। वैश्विक कच्चे तेल के बाजारों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, आम पेट्रोल की कीमतें लंबे समय से अपरिवर्तित बनी हुई हैं, क्योंकि नीति-निर्माता महंगाई को लेकर सतर्क हैं। चूंकि प्रीमियम पेट्रोल की खपत का हिस्सा काफी कम होता है, इसलिए कंपनियां आम जनता पर कोई असर डाले बिना इसकी कीमतों में बदलाव कर सकती हैं।