नयी दिल्ली। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट कोर्ट ने हजारों करोड़ रुपये के पीएनबी घोटाले में नीरव मोदी को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया है। नीरव मोदी को विशेष भगोड़ा आर्थिक अपराधी (एफईओ) अधिनियम के तहत भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है। नीरव मोदी इस कानून के तहत भगोड़ा घोषित किया जाने वाला दूसरा नागरिक है। इससे पहले इसी साल शराब कारोबारी विजय माल्या भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया पहला नागरिक था। इसके साथ ही नीरव मोदी की संपत्ति जब्त करने का रास्ता साफ हो गया है। इस कानून के तहत उन आर्थिक अपराधियों की संपत्ति की जब्त करने की अनुमति है जो भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र से बाहर रहकर अभियोग से बचते हैं। नीरव मोदी पर अपने अंकल मेहुल चोकसी के साथ मिल कर पीएनबी में 13,570 करोड़ रुपये का घोटाला करने का आरोप है। इस समय वे लंदन की वैंड्सवर्थ जेल में बंद है। पिछले महीने वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में मुख्य मजिस्ट्रेट एम्मा अर्बुथनोट ने मोदी के जमानत के लिए किये गये चौथे प्रयास को खारिज कर दिया था।

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आत्महत्या की दी थी धमकी
नीरव मोदी ने तीन मौकों से परिस्थितियों में कोई परिवर्तन न होने के आधार पर चौथी बार जमानत के लिए आवेदन किया था। उसने अपने प्रत्यर्पण का आदेश दिये जाने पर आत्महत्या की धमकी दी थी। भारत की अपील पर नीरव मोदी के खिलाफ प्रत्यर्पण वारंट जारी किया गया था, जिसके बाद लंदन पुलिस ने उसे 19 मार्च 2019 को गिरफ्तार कर लिया था। अभी भी भारतीय एजेंसियाँ उसके प्रत्यर्पण की कोशिश में लगी हुई हैं। चोकसी और मोदी दोनों के खिलाफ कई राजस्व और कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ जांच कर रही हैं।

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भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून
इस कानून के तहत वित्तीय फ्रॉड करने वालों पर पैसे न लौटाये जाने पर कार्रवाई हो सकती है। वे आर्थिक अपराधी जिसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो गया है उस पर कार्रवाई संभव है। साथ ही वे घोटालेबाज जो 100 करोड़ रुपए से ज्यादा के डिफॉल्टर होने के बाद देश से बाहर भाग गये हैं उन पर इस कानून के तहत कार्रवाई मुमकिन है। ऐसे घोटालेबाजों की संपत्ति बेच कर उनका कर्ज चुकाया जाने का प्रावधान है। किसी आरोपी को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने के लिए विशेष अदालत में याचिका दाखिर करनी होती है। जब्त की जा सकने वाली संपत्तियों की सूची भी देनी होती है।

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