नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) एक सरकारी दुर्घटना बीमा योजना है। इस योजना का ऐलान तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2015 के बजट भाषण में किया था। बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने औपचारिक तौर पर 8 मई को कोलकाता में इस योजना की शुरुआत की थी। इस योजना में साल में सिर्फ 12 रुपये का प्रीमियम भरने पर 2 लाख रुपये तक का कवर मिलता है, जो बीमाधारक का एक्सीडेंट होने से मृत्यु या पूर्ण विकलांगता होने पर उसके नॉमिनी को दिया जाता है। आंशिक स्थायी विकलांगता के मामले में बीमा की रकम 1 लाख रुपये होती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अगर आपने ये बीमा योजना ले रखी है तो 31 मई तक प्रीमियम भर दें। वैसे तो 12 रुपये बेहद छोटी रकम है और इस योजना के तहत आपके बैंक अकाउंट से खुद ही काट ली जाएगी, मगर यदि किसी कारण आपके खाते में इतने रुपये भी नहीं हैं तो आपको इस योजना के बेनेफिट नहीं मिलेंगे।

इन बातों का रखें ध्यान :

- इस सरकारी योजना में सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात यही है कि अगर आपका प्रीमियम जमा नहीं हुआ तो आपकी पॉलिसी रद्द हो जाएगी और ये फिर से रिन्यू नहीं होगी।
- पॉलिसी रद्द तब होगी जब आपके उस खाते, जिसमें से पॉलिसी का प्रीमियम काटा जाना है, में प्रीमियम की रकम न हो।
- एक बात और कि यदि आपका बैंक अकाउंट बंद हो गया तो उस स्थिति में पॉलिसी अपने आप बंद हो जाएगी। यहां ध्यान रखना जरूरी है कि समय समय पर अपने बैंक अकाउंट से थोड़ी बहुत लेन-देन और जानकारी लेते रहें।
- आप इस योजना के तहत किसी एक ही बैंक अकाउंट को जोड़ सकते हैं।

ऐसे करें पीएमएसबीवाई में आवेदन

पीएमएसबीवाई में 18 से 70 साल तक की आयु के व्यक्ति आवेदन कर सकते हैं। यदि आप इस योजना के तहत पॉलिसी लेना चाहते हैं तो आप किसी भी बैंक में सीधे जाकर इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा और भी की तरीके हैं जिनके जरिए आप ये पॉलिसी ले सकते हैं। इनमें बैंक मित्र, बीमा एजेंट और सरकारी तथा प्राइवेट बीमा कंपनियां भी शामिल हैं।

करोड़ों लोगों को हुआ फायदा

अब तक इस योजना का फायदा करोड़ों लोगों ने उठाया है। 31 मार्च 2019 तक के आंकड़ों के मुताबिक करीब 15.5 करोड़ लोग इस स्कीम के तहत कवर हैं। ध्यान रहे कि एक्सीडेंट के बाद अस्पताल के खर्चे इस योजना के तहत कवर नहीं होते। इस योजना का उद्देश्य देश के उन गरीबों को बीमा योजना देना था जो महंगी पॉलिसी नहीं खरीद पाते और जिन तक बीमा की पहुंच ही नहीं है।

Advertisement