Union cabinet meeting: आज 2 सितंबर सोमवार को केंद्रीय कैबिनेट ने अपनी बैठक पर किसानों के लिए बड़ा फैसला लिया है. पीएम नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में किसानों की इनकम बढ़ाने के लिए एग्रीकल्चर से जुड़े सात बड़े फैसले लिए गए है. इसके साथ ही मोदी कैबिनिट की इस बैठक में डीएएम (Digital Agriculture Mission) की घोषणा की है.

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2 सितंबर यानी आज मोदी की कैबिनट बैठक हुई है. इस बैठक में किसानों को लेकर कई बड़े फैसले कई गए. इस बैठक में जो भी फैसले हुए, वे किसानों के हित को देखते हुए लिए गए है. मोदी सरकार किसानों के लिए 7 बड़े एग्रीकल्चर प्रोजेक्ट लाएगी. इन प्रोजेक्ट में कुल 13,966 रुपये खर्च हो सकते हैं.

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2 सितंबर को बैठक के बाद केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishaw) ने मीडिया से बातचीत करते हुए कैबिनेट के इस फैसले के बारे में बताया है.

क्या है 7 बड़े प्रोजेक्ट ?

केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कैबिनट मंत्रिमंडल ने डिजिटल कृषि मिशन के लिए 2817 करोड़ रुपये, फसल विज्ञान के लिए 3,979 करोड़ रुपये और कृषि शिक्षा और प्रबंधन को मजबूत करने के लिए 2291 करोड़ रुपये आवंटित करने की योजना बनाई जा रही है.

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इसके अलावा पशुधन के स्वास्थ्य के लिए 1702 करोड़ रुपये और बागवानी क्षेत्र के विकास के लिए 860 करोड़ रुपये आवंटित करने का फैसला लिया है.

इसके साथ ही प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन को मजबूती देने के लिए 1,115 करोड़ रुपये और कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए 1,202 करोड़ रुपये देने की योजना है. कुल मिलाकर इन 7 प्रोजेक्ट में 13,960 करोड़ रुपये से अधिक खर्च आएगा.

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क्या है डीएएम मिशन?

इस बैठक ने मोदी सरकार ने डीएएम मिशन की घोषणा की थी. डीएएम मिशन को लाने का उद्देश्य एग्री स्टैक को बढ़ावा देना है. एग्री स्टैक कुछ नहीं सिर्फ किसानों से जुड़ा डेटाबेस है. एग्री स्टैक में किसानों से संबंधित सभी जानकारी डेटा के रूप में मौजूद होती है. इसमें किसानों की जमीन, उन पर कितनी फसल उगाई जा रही है, ये सभी जानकारी होती है.

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इसके अलावा इसमें किसान रजिस्ट्री, विलेज लैंड मैप्स रजिस्ट्री जैसी जानकारी देनी होती है. इसके साथ ही इस मिशन के जरिए कृषि निर्णय सहायता प्रणाली को भी बढ़ावा देना है.

क्या होती है कृषि निर्णय सहायता प्रणाली ?

कृषि निर्णय सहायता प्रणाली के तहत किसानों को खेती से जुड़ी सभी जानकारी दी जाती है. जैसे उन्हें सूखा और बाढ़, मौसम, जमीन के नीचे पानी इत्यादि के बारे में सूचित किया जाता है.

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