मिडिल ईस्ट (Middle East) में ट्रंप (Trump) और नेतन्याहू (Netanyahu) की अगुवाई में छिड़ा युद्ध (war) एक महीने से अधिक समय से जारी है। ईरान और इजराइल के बीच तनाव (tension) कम होने का नाम नहीं ले रहा है। सिर्फ बयानबाजी और युद्ध रोकने के दावे ही नहीं, बल्कि गोलाबारी भी लगातार बढ़ रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य में सप्लाई रुकने का असर दुनिया भर के देशों पर पड़ा है। ऐसे में भारत के लिए रूस एक भरोसेमंद ट्रेड पार्टनर के रूप में सामने आया है।

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्च 2026 में भारत ने रूस से अपने तेल आयात में लगभग 90% की वृद्धि की। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी के मुकाबले मार्च में रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ी है, जबकि पश्चिम एशिया से सप्लाई रुकावटों के कारण देश की कुल कच्चे तेल की खपत लगभग 15% कम हुई। पेट्रोलियम गैस (LPG) का आयात 40% तक घट गया, जबकि लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी LNG की सप्लाई में भी कमी आई, जिससे भारत को सप्लाई के वैकल्पिक रास्ते तलाशने पड़े।

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रूस से तेल की खरीद में तेजी-
दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 तक आयात सुस्त रहा, लेकिन अमेरिका द्वारा दी गई 30 दिन की राहत के बाद रूस से तेल की खरीद में तेजी आई। इसके साथ ही भारत ने अंगोला, गैबॉन, घाना और कांगो जैसे अफ्रीकी देशों से भी कच्चे तेल का आयात बढ़ाया, हालांकि इन देशों की हिस्सेदारी अभी भी सीमित रही।

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होर्मुज को बायपास करके स्पालई-
केप्लर के विश्लेषक सुमित रिटोइया का कहना है कि मध्य-पूर्व के तेल उत्पादकों ने होर्मुज को बायपास करने वाली पाइपलाइनों के जरिए सप्लाई भेजी, जैसे कि सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और UAE की हबशान-फुजैराह लाइन। इन वैकल्पिक मार्गों के कारण सप्लाई का प्रवाह कुछ हद तक बना रहा। रिटोइया ने कहा कि रूस से आयात अप्रैल में भी जारी रह सकता है और ईरान व वेनेजुएला से संभावित अतिरिक्त सप्लाई जोखिम कम कर सकती है।

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कतर से LNG आयात में गिरावट-
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, QatarEnergy द्वारा घोषित फोर्स मेज्योर और होर्मुज रुकावटों के कारण कतर से LNG आयात में 92% की भारी गिरावट हुई। LPG में कमी को घरेलू उत्पादन बढ़ाकर और औद्योगिक तथा व्यापारिक उपभोक्ताओं को सप्लाई सीमित करके संभाला गया। इससे भारत के 33 करोड़ से अधिक घरेलू उपभोक्ताओं के लिए LPG की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकी।

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पूरे मामले से यह स्पष्ट है कि वैश्विक संघर्ष सिर्फ युद्धरत देशों को ही प्रभावित नहीं करता। भारत ने इस संकट में रणनीतिक दूरदर्शिता दिखाई और अपने ऊर्जा स्रोतों को अलग-अलग देशों से पूरा किया। रूस जैसे भरोसेमंद पार्टनर के साथ व्यापार बढ़ाना और वैकल्पिक मार्गों से सप्लाई सुनिश्चित करना, भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण कदम है। भविष्य में भी ऐसे वैश्विक संकटों के लिए भारत को सतर्क और तैयार रहना होगा।