नयी दिल्ली। हाउसिंग फाइनेंस कंपनी एचडीएफसी ने प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (सीएलएसएस) के तहत 2 लाख से अधिक घर खरीदारों को सब्सिडी के रूप में 4,700 करोड़ रुपये दिए हैं। पीएमएवाई सरकार की प्रमुख आवासीय योजना है। इसके अलावा सीएलएसएस योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस), निम्न आय समूह (एलआईजी) और मध्य आय समूहों (एमआईजी) से संबंधित घर खरीदारों को 47,000 करोड़ रुपये के लोन की पेशकश की गई है। एचडीएफसी सरकार के 'अफोर्डेबल हाउसिंग फॉर ऑल' के लक्ष्य को पूरा करने के लिए आवास और शहरी मामला मंत्रालय और नेशनल हाउसिंग बैंक के साथ मिल कर काम कर रही है।
एचडीएफसी की मैनेजिंग डायरेक्टर रेणु सूद कर्नाड के मुताबिक सरकार की पीएमएवाई योजना 2015 से अलग-अलग इनकम वाले समूहों के घर खरीदारों की मदद कर रही है। यह योजना कंपनी के नजरिए से मिलती है कि हर भारतीय के पास अपना घर होना चाहिए। हम आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय और नेशनल हाउसिंग बैंक को उनकी प्रतिबद्धता और विभिन्न हितधारकों से मिले इनपुट और सुझावों के लिए धन्यवाद करते हैं। क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना (सीएलएसएस) जून 2015 में पीएमएवाई के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, निम्न आय वर्ग के ग्राहकों को होम लोन देने लिए शुरू की गई थी और इसे जनवरी 2017 से मध्य आय के घर खरीदारों के लिए भी शुरू किया गया।
योजना के अनुसार ईडब्ल्यूएस और एलआईजी कैटेगरी (वार्षिक घरेलू आय 6,00,000 रुपये तक) के उधारकर्ताओं को 6,00,000 रुपये तक के लोन पर 6.5 फीसदी सालाना की ब्याज सब्सिडी दी जाती है। वहीं एमआईजी 1 कैटेगरी (वार्षिक घरेलू आय 6,00,001 रुपये से 12,00,000 रुपये के बीच) के उधारकर्ताओं को 9 लाख रु तक के लोन पर 4 फीसदी सालाना की ब्याज मिलती है। इसके अलावा एमआईजी 2 कैटेगरी (वार्षिक घरेलू आय 12,00,001 रुपये से 18,00,000 रुपये के बीच) के उधारकर्ताओं को 12 लाख रु तक के लोन पर 3 फीसदी सालाना की ब्याज मिलती है। लोन की अधिकतम अवधि 20 वर्ष होनी चाहिए।
ग्राहक को 20 साल की अवधि में मिलने वाली सब्सिडी राशि 2.30 से 2.67 लाख रुपये होती है, जो उन्हें अपफ्रंट मिलती है। एमआईजी कैटेगरी की योजनाएं 31 मार्च 2021 तक लागू हैं और ईडब्लूएस / एलआईजी के लिए योजनाएं 31 मार्च 2022 तक वैलिड हैं। घरों के निर्माण कार्य शुरू करने और पूरा करने के लिए पीएमएवाई के 3 चरण हैं। 100 शहरों को कवर करने के लिए अप्रैल 2015 से मार्च 2017 तक इस योजना का पहला चरण रहा, जबकि अतिरिक्त 200 शहरों को कवर करने के लिए अप्रैल 2017 से मार्च 2019 तक इसका दूसरा चरण रहा। शेष शहरों को कवर करने के लिए अप्रैल 2019 से मार्च 2022 तक इस योजना का तीसरा चरण चल रहा है।
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