नयी दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को दस सेक्टरों के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) योजना को मंजूरी दे दी है। इन 10 सेक्टरों में व्हाइट गुड्स, ऑटो, ऑटो कम्पोनेंट और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग शामिल हैं। पीएलआई योजना के तहत अगले 5 सालों में 1.46 लाख करोड़ रु की सहायता दी जाएगी। इस योजना का देश में प्रोडक्शन को बढ़ावा देना है। हाल ही में एक रिपोर्ट आई थी कि केंद्र सरकार जल्द ही घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट करने और एशिया में वैकल्पिक वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग केंद्र के रूप में देश को आगे बढ़ाने के लिए कम से कम आठ और क्षेत्रों में पीएलआई योजना का विस्तार करेगी।

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इन सेक्टरों पर हुई चर्चा
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार जो सेक्टर सरकार के सामने चर्चा का विषय थे उनमें बैटरी मैन्युफैक्चरिंग, ऑटो कम्पोनेंट, नेटवर्क प्रोडक्ट, कपड़ा, फूड प्रोसेसिंग, सोलर फोटोवोल्टिक सेल्स, जीनोमिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 5जी, रोबोटिक्स और ड्रोन शामिल हैं। बता दें कि ऑटो कंपोनेंट्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर को 57,000 करोड़ रु की राशि दी जाएगी।

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इन सेक्टरों के लिए पहले से लागू है योजना
सरकार पहले ही इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए 50,000 करोड़ रुपये और सक्रिय फार्मास्युटिकल सामग्री (एपीआई) के लिए 10,000 करोड़ रुपये की पीएलआई योजना शुरू कर चुकी है। पीएलआई भारत को एक आकर्षक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की योजना का हिस्सा है। इसके जरिए भारत को चीन की जगह लेने और आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। इसके लिए 25 फीसदी के कॉर्पोरेट टैक्स रेट में कटौती की जाएगी। साथ ही पीएलआई बेनेफिट्स और चरणबद्ध विनिर्माण योजना (पीएमपी) से भी सहारा लिया जाएगा।

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24 सेक्टरों की हुई पहचान
सरकार ने पीएलआई और पीएमपी योजनाओं के जरिए मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए 24 सेक्टरों की पहचान की है। इनमें फुटवियर, सिरेमिक और ग्लास, इथेनॉल, रेडी-टू-ईट फूड, एल्यूमीनियम, जिम का सामान, खिलौने और खेल का सामान, ड्रोन, रोबोटिक्स और इलेक्ट्रिक वाहन उपकरण शामिल हैं। इनमें से कुछ क्षेत्रों की पहचान घरेलू विनिर्माण और आयात प्रतिस्थापन के लिए प्राथमिकता के रूप में की गई है।

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